नवरात्रि व्रत के नियम
नवरात्रि में पहले दिन कलश स्थापना करके नौ दिन माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है, अखंड ज्योति जलाई जाती है और सात्विक भोजन या फलाहार किया जाता है। प्याज़-लहसुन, अनाज (व्रत रखने वाले के लिए), बाल-नाखून काटना और तामसिक चीज़ें टाली जाती हैं।

✅ क्या करें
- शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना और जौ (खेतरी) बोएँ।
- अखंड ज्योति जलाएँ तो उसका ध्यान रखें कि बुझे नहीं।
- रोज़ दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ और आरती करें।
- अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन करें।
- व्रत में फल, दूध, कुट्टू, सिंघाड़ा, साबूदाना और सेंधा नमक लें।
❌ क्या न करें
- प्याज़, लहसुन, मांस-मदिरा का सेवन न करें।
- व्रत रखने वाले गेहूँ, चावल और साधारण नमक न लें।
- बाल और नाखून कटवाने से बचें।
- अखंड ज्योति जली हो तो घर ख़ाली न छोड़ें।
- किसी स्त्री या कन्या का अपमान न करें।
ये नियम परंपरा और मान्यताओं पर आधारित हैं; अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इनमें अंतर हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नवरात्रि में कन्या पूजन कब करें?
अष्टमी या नवमी को, 2 से 10 साल की 9 कन्याओं और एक बालक (लांगुर) को भोजन कराकर।
नवरात्रि व्रत में क्या खाएँ?
फल, दूध, दही, कुट्टू, सिंघाड़ा, राजगिरा, साबूदाना, आलू, मखाने और सेंधा नमक।
