संत भजन
भक्ति काल के संत कवियों के भजन — मीराबाई, सूरदास, तुलसीदास, रैदास और नरसी मेहता — पूरे बोल और हर पंक्ति के सरल हिंदी अर्थ के साथ।

मीराबाई के भजन
- पायो जी मैंने राम रतन धन पायोमीराबाई का भजन, अर्थ सहित
- मेरे तो गिरधर गोपालमीराबाई का भजन, अर्थ सहित
- हरि तुम हरो जन की भीरमीराबाई का भजन, अर्थ सहित
- बसो मेरे नैनन में नंदलालमीराबाई का भजन, अर्थ सहित
- मैं तो साँवरे के रंग राचीमीराबाई का भजन, अर्थ सहित
- पग घुँघरू बाँधि मीरां नाचीमीराबाई का भजन, अर्थ सहित
- स्याम म्हाने चाकर राखो जीमीराबाई का भजन, अर्थ सहित
- माई री मैं तो लियो गोविंदो मोलमीराबाई का भजन, अर्थ सहित
- मन रे परसि हरि के चरणमीराबाई का भजन, अर्थ सहित
सूरदास के भजन
- मैया मोरी मैं नहिं माखन खायोसूरदास का पद, अर्थ सहित
- सबसे ऊँची प्रेम सगाईसूरदास का पद, अर्थ सहित
- प्रभु मोरे अवगुन चित न धरोसूरदास का भजन, अर्थ सहित
- मैया मोहिं दाऊ बहुत खिझायोसूरदास का भजन, अर्थ सहित
- मैयासूरदास का भजन, अर्थ सहित
- जसोदा हरि पालनैं झुलावैसूरदास का भजन, अर्थ सहित
- ऊधौसूरदास का भजन, अर्थ सहित
- निसिदिन बरसत नैन हमारेसूरदास का भजन, अर्थ सहित
- चरन कमल बंदौं हरि राईसूरदास का भजन, अर्थ सहित
- मो सम कौन कुटिल खल कामीसूरदास का भजन, अर्थ सहित
- अबिगत-गति कछु कहत न आवैसूरदास का भजन, अर्थ सहित
तुलसीदास के भजन
- ठुमक चलत रामचंद्रतुलसीदास का भजन, अर्थ सहित
- जाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारेतुलसीदास का भजन, अर्थ सहित
- अब लौं नसानीतुलसीदास का भजन, अर्थ सहित
- ऐसो को उदार जग माहींतुलसीदास का भजन, अर्थ सहित
- केसवतुलसीदास का भजन, अर्थ सहित
- मन पछितैहै अवसर बीतेतुलसीदास का भजन, अर्थ सहित
- कबहुँक हौं यहि रहनि रहौंगोतुलसीदास का भजन, अर्थ सहित
नरसी मेहता के भजन
पारंपरिक धुन
कबीरदास के भजन
- मोको कहाँ ढूँढे रे बंदेकबीरदास का भजन, अर्थ सहित
- झीनी झीनी बीनी चदरियाकबीरदास का भजन, अर्थ सहित
- मन लागो मेरो यार फकीरी मेंकबीरदास का भजन, अर्थ सहित
- रहना नहिं देस बिराना हैकबीरदास का भजन, अर्थ सहित
- साधोकबीरदास का भजन, अर्थ सहित
- घूँघट का पट खोल रेकबीरदास का भजन, अर्थ सहित
- माया महा ठगिनी हम जानीकबीरदास का भजन, अर्थ सहित
- भजो रे भैया राम गोविंद हरीकबीरदास का भजन, अर्थ सहित
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मीराबाई के प्रसिद्ध भजन कौन से हैं?
‘पायो जी मैंने राम रतन धन पायो’, ‘मेरे तो गिरधर गोपाल’, ‘हरि तुम हरो जन की भीर’ और ‘बसो मेरे नैनन में नंदलाल’।
सूरदास के प्रसिद्ध पद कौन से हैं?
‘मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो’ और ‘सबसे ऊँची प्रेम सगाई’ — दोनों बोल और अर्थ के साथ यहाँ हैं।
महात्मा गांधी के प्रिय भजन कौन से थे?
‘वैष्णव जन तो तेने कहिये’ (नरसी मेहता), ‘रघुपति राघव राजाराम’ और ‘हरि तुम हरो जन की भीर’ (मीराबाई)।
