जय गणेश जय गणेश देवा — गणेश आरती
‘जय गणेश जय गणेश देवा’ भगवान गणेश की सबसे लोकप्रिय हिंदी आरती है, जो परंपरा से सूरदास जी की मानी जाती है। किसी भी शुभ काम या पूजा की शुरुआत गणेश वंदना से होती है।
बुधवार गणेश जी का दिन है, और गणेश चतुर्थी के दस दिनों में यह आरती रोज़ सुबह-शाम गाई जाती है।

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
हे गणेश देव, आपकी जय हो। आपकी माता पार्वती हैं और पिता महादेव शिव हैं।
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी। माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
आप एक दाँत वाले, दयालु और चार भुजाओं वाले हैं। माथे पर सिंदूर शोभा देता है और मूषक आपकी सवारी है।
पान चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा। लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
आपको पान, फूल और मेवे चढ़ाए जाते हैं, लड्डुओं का भोग लगता है और संत आपकी सेवा करते हैं।
अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया। बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
आप अंधों को आँखें, रोगियों को स्वस्थ शरीर, निःसंतान को संतान और निर्धन को धन देते हैं।
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
सूरदास कहते हैं कि वे आपकी शरण में आए हैं, उनकी सेवा सफल कीजिए।
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी। कामना को पूर्ण करो, जाऊँ बलिहारी॥
हे शिव-पुत्र, दीनों की लाज रखिए और मनोकामना पूरी कीजिए, मैं आप पर बलिहारी जाऊँ।
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
आरती का समापन फिर से पहली पंक्ति से — हे गणेश देव, आपकी जय हो।
जय गणेश जय गणेश देवा का पाठ पूरा हुआ।
किसी अपने को WhatsApp पर भेजेंपाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।




