बहुला गाय की कथा
ब्रज में श्रीकृष्ण की गायों में बहुला नाम की एक गाय थी, जो सबको बहुत प्यारी थी। एक दिन चरते-चरते वह झुंड से बिछड़कर जंगल में दूर निकल गई।
अचानक एक शेर सामने आया और उसे खाने को तैयार हो गया। बहुला ने विनती की, ‘मेरा छोटा बछड़ा घर पर भूखा है। मुझे उसे आख़िरी बार दूध पिला आने दो, फिर मैं ख़ुद तुम्हारे पास लौट आऊँगी।’
शेर ने कहा, ‘तुम लौटकर आओगी, इसका क्या भरोसा?’ बहुला ने सत्य और धर्म की शपथ ली। शेर ने उसे जाने दिया।
बहुला ने घर जाकर बछड़े को दूध पिलाया, उसे प्यार किया और अपना वचन निभाने जंगल लौट आई। उसकी सच्चाई देखकर शेर अपने असली रूप में आ गया — वह स्वयं श्रीकृष्ण थे, जो बहुला की परीक्षा ले रहे थे।
श्रीकृष्ण ने कहा, ‘बहुला, तुम्हारी सत्यनिष्ठा से मैं प्रसन्न हूँ। आज से भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी को तुम्हारी पूजा होगी और जो माताएँ यह व्रत करेंगी, उनकी संतान सुखी रहेगी।’
यह कथा पारंपरिक कथा का OmKiran Bhakti द्वारा सरल हिंदी में किया गया पुनर्कथन है; अलग-अलग क्षेत्रों में कथा के विवरण में थोड़ा अंतर मिलता है।

