पाठ 1: हारमोनियम को जानें
हारमोनियम में दो हिस्से हैं — आगे पट्टियाँ (सफ़ेद और काली) और पीछे धौंकनी। बाएँ हाथ से धौंकनी चलाते हैं, जिससे हवा भरती है, और दाएँ हाथ से पट्टियाँ दबाते हैं। ऊपर लगे बटन (स्टॉप) खोलने पर आवाज़ निकलती है; पहले "ड्रोन" स्टॉप खोल लें तो सा लगातार गूँजता है।
धौंकनी हल्के, बराबर दबाव से चलाएँ — झटके से नहीं। आवाज़ एक-सी रहनी चाहिए, लहर जैसी नहीं।
पाठ 2: सा कहाँ है — सफ़ेद 1, काली 1
पट्टियों में दो और तीन काली पट्टियों के गुच्छे बार-बार आते हैं। दो काली पट्टियों वाले गुच्छे के ठीक बाएँ की सफ़ेद पट्टी को सफ़ेद 1 (C) कहते हैं। शुरुआत में इसी को सा मानें — तब सा रे ग म प ध नि सातों सफ़ेद पट्टियों पर आते हैं।
गाते समय अपनी आवाज़ के हिसाब से सा बदला जाता है (काली 1, सफ़ेद 2…)। नीचे प्लेयर में "सा का सुर" बदलकर देखें — सा वाली पट्टी पीली दिखती है।
पाठ 3: सात सुर और तीन सप्तक
सात सुर हैं: सा, रे, ग, म, प, ध, नि। नि के बाद फिर सा आता है, पर ऊँचा — उसे तार सा कहते हैं। सा से नीचे वाले सुर मंद्र सप्तक कहलाते हैं (लिखते समय नीचे बिंदु), बीच वाले मध्य सप्तक और ऊपर वाले तार सप्तक (ऊपर बिंदु)।
- प्लेयर में "अभ्यास 1: सरगम ऊपर-नीचे" चुनें।
- ▶ बजाएँ दबाकर एक बार सुनें, चमकती पट्टियाँ देखें।
- अब ✋ अभ्यास मोड दबाएँ और ख़ुद बजाएँ — सही पट्टी दबाने पर ही आगे बढ़ेगा।
- साथ-साथ "सा रे ग म…" गाते भी जाएँ, इससे कान और गला दोनों सधते हैं।
पाठ 4: कोमल और तीव्र सुर
रे, ग, ध, नि के कोमल रूप (आधा सुर नीचे) काली पट्टियों पर होते हैं — लिखते समय नीचे लकीर: रे॒ ग॒ ध॒ नि॒। म का तीव्र रूप (आधा सुर ऊपर) भी काली पट्टी पर है — ऊपर लकीर। सा और प कभी कोमल-तीव्र नहीं होते। "अभ्यास 5" में सारे 12 सुर एक के बाद एक बजते हैं।
पाठ 5: उँगलियाँ और अलंकार
अलंकार सुरों के छोटे-छोटे पैटर्न हैं — जैसे व्यायाम। रोज़ 10 मिनट अलंकार करने से उँगलियाँ अपने-आप सही पट्टी पर जाने लगती हैं। पहले धीमी रफ़्तार (50–60%) पर बजाएँ, बिना गलती बजने लगे तब रफ़्तार बढ़ाएँ।
- दाएँ हाथ की तर्जनी सा पर, मध्यमा रे पर, अनामिका ग पर रखें।
- म के लिए अंगूठा तर्जनी के नीचे से निकालकर रखें, फिर तर्जनी प पर — इसी तरह आगे बढ़ें।
- हर अलंकार पहले आरोह (ऊपर), फिर अवरोह (नीचे)।
- "चुनी पंक्ति दोहराएँ" लगाकर एक ही पंक्ति कई बार बजाएँ।
अभ्यास का हारमोनियम
ऊपर गाना/अभ्यास चुनें — अलंकार और आरतियाँ दोनों यहीं हैं
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पाठ 6: पहला गाना
सबसे आसान से शुरू करें — ॐ जय जगदीश हरे, फिर जय गणेश देवा
