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छठ व्रत के नियम: चारों दिन क्या करें, क्या न करें

छठ का व्रत 13 नवंबर 2026 (नहाय-खाय) से शुरू होकर 16 नवंबर (उषा अर्घ्य) को पूरा होता है। 14 नवंबर की शाम खरना का प्रसाद खाने के बाद व्रती का लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है, जो 16 नवंबर की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर खुलता है। मुख्य नियम: पूरी शुद्धता, लहसुन-प्याज़ और मांसाहार नहीं, प्रसाद में साफ़ बर्तन, और व्रती का ज़मीन पर सोना।

चारों दिन एक नज़र में

दिनतारीख़व्रती क्या करते हैं
नहाय-खाय13 नवंबर, शुक्रवारस्नान के बाद एक बार सात्विक भोजन: कद्दू, चावल और चने की दाल
खरना14 नवंबर, शनिवारदिन भर व्रत, शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद; इसके बाद निर्जला व्रत शुरू
संध्या अर्घ्य15 नवंबर, रविवारनिर्जला व्रत; घाट पर डूबते सूर्य को अर्घ्य
उषा अर्घ्य16 नवंबर, सोमवारउगते सूर्य को अर्घ्य और फिर पारण

पहला दिन: नहाय-खाय के नियम

  • सुबह नदी, तालाब या घर पर स्नान करें; घर और रसोई की अच्छी तरह सफ़ाई करें।
  • व्रती स्नान के बाद ही भोजन बनाएँ या खाएँ। खाना सात्विक हो, लहसुन-प्याज़ बिल्कुल नहीं।
  • भोजन में कद्दू की सब्ज़ी, चावल और चने की दाल बनती है। कई घरों में सादे नमक की जगह सेंधा नमक और तेल की जगह घी लिया जाता है।
  • परिवार के लोग भी इन दिनों सात्विक भोजन करें।

दूसरा दिन: खरना के नियम

  • व्रती दिन भर व्रत रखते हैं और सूर्यास्त के बाद पूजा करके प्रसाद खाते हैं।
  • प्रसाद में गुड़ की खीर, रोटी और केला होता है। यह मिट्टी के चूल्हे पर साफ़ बर्तन में बनाना अच्छा माना जाता है।
  • इस प्रसाद में नमक नहीं डाला जाता।
  • पहले व्रती प्रसाद खाते हैं, उसके बाद परिवार के लोग।
  • खरना का प्रसाद खाने के बाद से पानी भी नहीं लिया जाता। यहीं से निर्जला व्रत शुरू होता है।

तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य के नियम

  • प्रसाद (ठेकुआ, कसार) और सूप-दउरा की तैयारी शुद्धता से करें। प्रसाद को जूठा न होने दें।
  • शाम को दउरा सिर पर रखकर घाट जाते हैं। सूप में फल, गन्ना, ठेकुआ और दीपक सजाते हैं। पूरी लिस्ट: छठ पूजा सामग्री।
  • व्रती पानी में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। दिल्ली में सूर्यास्त शाम 5:27 और पटना में शाम 5:00 बजे है। अपने शहर का अर्घ्य का समय देखें।
  • अर्घ्य में दूध और जल दिया जाता है। प्लास्टिक के बर्तन से अर्घ्य न दें; ताँबे या पीतल का लोटा और बाँस का सूप लें।

चौथा दिन: उषा अर्घ्य और पारण

  • सूर्योदय से पहले घाट पहुँचें। दिल्ली में सूर्योदय सुबह 6:44 और पटना में सुबह 6:07 बजे है।
  • उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठी मैया से परिवार की मंगल कामना करें।
  • घाट पर प्रसाद बाँटें। घर आकर व्रती प्रसाद और जल लेकर व्रत खोलते हैं, इसे पारण कहते हैं।
  • लंबे निर्जला व्रत के बाद पहले हल्का प्रसाद लें, एकदम भारी भोजन न करें।

पूरे व्रत में क्या न करें

  • लहसुन, प्याज़, मांस, शराब और तंबाकू घर में न लाएँ।
  • व्रती पलंग या चारपाई पर न सोएँ; ज़मीन पर चटाई या कंबल बिछाकर सोएँ।
  • बिना नहाए या जूठे हाथों से पूजा की चीज़ें और प्रसाद न छुएँ।
  • पूजा पूरी होने से पहले प्रसाद के फल न खाएँ।
  • फटे सूप या दउरा का उपयोग न करें। हर साल नया लेना अच्छा माना जाता है।
  • व्रती के सामने खाने-पीने की चीज़ों का ध्यान रखें और घर में झगड़ा या कड़वी बातें न करें।

सेहत का ध्यान रखें

बिना पानी का लंबा व्रत शरीर के लिए कठिन होता है। गर्भवती महिलाएँ, बुज़ुर्ग, या शुगर, किडनी, ब्लड प्रेशर जैसी बीमारी वाले लोग पहले डॉक्टर से पूछें। चक्कर या बहुत कमज़ोरी लगे तो पानी लेने में संकोच न करें। ठंडे पानी में बहुत देर न खड़े रहें, और घाट पर बच्चों और बुज़ुर्गों के साथ कोई न कोई रहे।

जानकारी की जाँच: 27 अक्टूबर 2026। ये परंपराएँ और मान्यताएँ हैं; अपने परिवार की रीति को प्राथमिकता दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

छठ व्रत 2026 कब से शुरू है?

13 नवंबर 2026 (शुक्रवार) को नहाय-खाय से शुरू होकर 16 नवंबर (सोमवार) को उषा अर्घ्य पर पूरा होता है।

छठ का निर्जला व्रत कब शुरू होता है?

खरना का प्रसाद खाने के बाद, यानी 14 नवंबर की शाम से। यह 16 नवंबर की सुबह अर्घ्य के बाद खुलता है।

छठ व्रत कितने घंटे का होता है?

खरना के बाद से उषा अर्घ्य तक लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत होता है।

नहाय-खाय में क्या खाते हैं?

कद्दू की सब्ज़ी, चावल और चने की दाल, बिना लहसुन-प्याज़ के।

खरना में क्या खाते हैं?

गुड़ की खीर, रोटी और केला। इसमें नमक नहीं होता और पहले व्रती खाते हैं।

छठ व्रती ज़मीन पर क्यों सोते हैं?

यह संयम और सादगी का नियम है। व्रती इन दिनों पलंग छोड़कर ज़मीन पर चटाई या कंबल बिछाकर सोते हैं।

क्या पुरुष भी छठ व्रत रख सकते हैं?

हाँ। छठ का व्रत महिला और पुरुष दोनों रखते हैं।

छठ व्रत का पारण कैसे करें?

16 नवंबर की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद प्रसाद और जल लेकर व्रत खोलें, फिर हल्का भोजन करें।

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