करवा माता की आरती — ॐ जय करवा मैया, बोल और अर्थ
‘ॐ जय करवा मैया’ करवा चौथ की शाम कथा सुनने के बाद गाई जाने वाली करवा माता की आरती है। करवा माता को माँ पार्वती का रूप माना जाता है; आरती में पति की लंबी आयु और सुहाग के सुख की कामना है।
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पाठभेद: अलग-अलग घरों और पुस्तकों में कुछ शब्द अलग मिलते हैं; यहाँ प्रचलित पाठ दिया है।

ॐ जय करवा मैया, माता जय करवा मैया। जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया॥
हे करवा माता, आपकी जय हो। जो स्त्री श्रद्धा से आपका व्रत रखती है, आप उसकी जीवन-नैया पार लगा देती हैं।
सब जग की हो माता, तुम हो रुद्राणी। यश तुम्हारा गावत, जग के सब प्राणी॥
आप पूरे संसार की माता हैं, आप ही शिव जी की पत्नी (रुद्राणी, यानी माँ पार्वती) हैं। संसार के सभी प्राणी आपका यश गाते हैं।
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो नारी व्रत करती। दीर्घायु पति होवे, दुख सारे हरती॥
कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को जो स्त्री यह व्रत करती है, उसके पति की आयु लंबी होती है और आप उसके सारे दुख हर लेती हैं।
होए सुहागिन नारी, सुख संपत्ति पावे। गणपति जी बड़े दयालु, विघ्न सभी नाशे॥
वह स्त्री सदा सुहागिन रहती है और सुख-संपत्ति पाती है। दयालु गणेश जी उसके सारे विघ्न दूर कर देते हैं।
करवा मैया की आरती, व्रत कर जो गावे। व्रत हो जाता पूरन, सब विधि सुख पावे॥
जो स्त्री व्रत रखकर करवा माता की यह आरती गाती है, उसका व्रत पूरा माना जाता है और उसे हर तरह का सुख मिलता है।
करवा माता की आरती का पाठ पूरा हुआ।
किसी अपने को WhatsApp पर भेजेंपाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।


