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मन लागो मेरो यार फकीरी में — कबीरदास — पूरे बोल और भावार्थ

‘मन लागो मेरो यार फकीरी में’ कबीरदास की रचना है। कबीर कहते हैं — मेरा मन फ़कीरी में लग गया है। जो सुख राम-भजन में है, वह अमीरी में नहीं। सबकी भली-बुरी सुनकर गरीबी में गुज़ारा कर लो; प्रेम नगर में रहो और सब्र रखो। आख़िर यह शरीर मिट्टी में मिलेगा, फिर घमंड किस बात का? साहिब सब्र से ही मिलते हैं।

कबीरदास की रचना। सभी संत भजन।

पाठभेद: यह पाठ प्रचलित संस्करणों से लिया गया है; अलग-अलग पुस्तकों और गायकों में कुछ शब्द अलग मिलते हैं। हम इसे मुद्रित संस्करण से मिलान कर रहे हैं।

मन लागो मेरो यार फकीरी में — कबीरदास — पूरे बोल और भावार्थ

मन लागो मेरो यार फकीरी में। जो सुख पावो राम भजन में, सो सुख नाहिं अमीरी में॥ भला बुरा सब का सुन लीजै, कर गुजरान गरीबी में। प्रेम नगर में रहनि हमारी, भलि बनि आई सबूरी में॥ हाथ में कूँडी बगल में सोटा, चारों दिसि जागीरी में। आखिर यह तन खाक मिलैगा, कहाँ फिरत मगरूरी में॥ कहत कबीर सुनो भाई साधो, साहिब मिलै सबूरी में॥

भावार्थ: कबीर कहते हैं — मेरा मन फ़कीरी में लग गया है। जो सुख राम-भजन में है, वह अमीरी में नहीं। सबकी भली-बुरी सुनकर गरीबी में गुज़ारा कर लो; प्रेम नगर में रहो और सब्र रखो। आख़िर यह शरीर मिट्टी में मिलेगा, फिर घमंड किस बात का? साहिब सब्र से ही मिलते हैं।

मन लागो मेरो यार फकीरी में — कबीरदास का पाठ पूरा हुआ।

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पाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।

Man Lago Mero Yar Phakiri Men — Lyrics in English

अंग्रेज़ी अक्षरों (Roman Hindi) में पढ़ें

Man lago mero yar phakiri men ।
Jo sukh pavo ram bhajan men, so sukh nahin amiri men ॥
Bhala bura sab ka sun lijai, kar gujran garibi men ।
Prem nagar men rahni hamari, bhali bani ai saburi men ॥
Hath men kundi bagal men sota, charon disi jagiri men ।
Akhir yah tan khak milaiga, kahan phirat magruri men ॥
Kahat kabir suno bhai sadho, sahib milai saburi men ॥

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

‘मन लागो मेरो यार फकीरी में’ किसने लिखा?

कबीरदास ने।

‘मन लागो मेरो यार फकीरी में’ का अर्थ क्या है?

कबीर कहते हैं — मेरा मन फ़कीरी में लग गया है। जो सुख राम-भजन में है, वह अमीरी में नहीं। सबकी भली-बुरी सुनकर गरीबी में गुज़ारा कर लो; प्रेम नगर में रहो और सब्र रखो। आख़िर यह शरीर मिट्टी में मिलेगा, फिर घमंड किस बात का? साहिब सब्र से ही मिलते हैं।

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