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शनिदेव की आरती — जय जय श्री शनिदेव, बोल और अर्थ

‘जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी’ शनिदेव की सबसे प्रचलित आरती है, जो शनि चालीसा के बाद शनिवार को गाई जाती है।

इसके साथ शनि चालीसा और दशरथ कृत शनि स्तोत्र भी पढ़ें।

शनिदेव की आरती — जय जय श्री शनिदेव, बोल और अर्थ

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥

भक्तों का भला करने वाले शनिदेव की जय हो; आप सूर्य के पुत्र हैं और छाया आपकी माता हैं।

श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी। नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥

साँवला शरीर, टेढ़ी दृष्टि, चार भुजाएँ; हे नाथ, आप नीले वस्त्र पहनते हैं और हाथी पर सवार होते हैं।

क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी। मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥

सिर पर मुकुट और चमकता माथा है; गले में मोतियों की माला शोभा देती है — उस छवि पर बलिहारी।

मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी। लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥

लड्डू, मिठाई, पान और सुपारी चढ़ते हैं; लोहा, तिल, तेल, उड़द और भैंस आपको बहुत प्रिय हैं।

देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी। विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥

देवता, दानव, ऋषि-मुनि और नर-नारी आपको याद करते हैं; विश्वनाथ भी ध्यान करते हैं — हम आपकी शरण में हैं।

शनिदेव की आरती का पाठ पूरा हुआ।

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पाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।

साथ में गाएँ — वीडियो

Shanidev Ki Arti — Lyrics in English

अंग्रेज़ी अक्षरों (Roman Hindi) में पढ़ें

Jai jai shri shanidev bhaktan hitkari ।
Suraj ke putra prabhu chhaya mahtari ॥

Shyam ank vakra drisht chaturbhuja dhari ।
Nilambar dhar nath gaj ki aswari ॥

Krit mukut shish rajit dipat hai lilari ।
Muktan ki mala gale shobhit balihari ॥

Modak mishthan pan charhat hain supari ।
Loha til tel urad mahishi ati pyari ॥

Dev danuj rishi muni sumirat nar nari ।
Vishvanath dharat dhyan sharan hain tumhari ॥

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