OmKiran BhaktiOmKiran Bhaktiभजन, आरती, चालीसा और मंत्र

चरन कमल बंदौं हरि राई — सूरदास — पूरे बोल और भावार्थ

‘चरन कमल बंदौं हरि राई’ सूरदास की रचना है। सूरसागर का मंगलाचरण — मैं हरि के चरण कमलों की वंदना करता हूँ, जिनकी कृपा से लंगड़ा पहाड़ लाँघ जाता है, अंधे को सब दिखने लगता है, बहरा सुनने लगता है, गूँगा बोलने लगता है और गरीब राजा बन जाता है।

सूरदास की रचना। सभी संत भजन।

पाठभेद: यह पाठ प्रचलित संस्करणों से लिया गया है; अलग-अलग पुस्तकों और गायकों में कुछ शब्द अलग मिलते हैं। हम इसे मुद्रित संस्करण से मिलान कर रहे हैं।

चरन कमल बंदौं हरि राई — सूरदास — पूरे बोल और भावार्थ

चरन कमल बंदौं हरि राई। जाकी कृपा पंगु गिरि लंघै, अंधे कौं सब कछु दरसाई॥ बहिरौ सुनै, मूक पुनि बोलै, रंक चलै सिर छत्र धराई। सूरदास स्वामी करुनामय, बार-बार बंदौं तिहिं पाई॥

भावार्थ: सूरसागर का मंगलाचरण — मैं हरि के चरण कमलों की वंदना करता हूँ, जिनकी कृपा से लंगड़ा पहाड़ लाँघ जाता है, अंधे को सब दिखने लगता है, बहरा सुनने लगता है, गूँगा बोलने लगता है और गरीब राजा बन जाता है।

चरन कमल बंदौं हरि राई — सूरदास का पाठ पूरा हुआ।

किसी अपने को WhatsApp पर भेजें

पाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।

Charan Kamal Bandaun Hari Rai — Lyrics in English

अंग्रेज़ी अक्षरों (Roman Hindi) में पढ़ें

Charan kamal bandaun hari rai ।
Jaki kripa pangu giri langhai, andhe kaun sab kachhu darasai ॥
Bahirau sunai, muk puni bolai, rank chalai sir chhatra dharai ।
Surdas swami karunamay, bar-bar bandaun tihin pai ॥

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

‘चरन कमल बंदौं हरि राई’ किसने लिखा?

सूरदास ने।

‘चरन कमल बंदौं हरि राई’ का अर्थ क्या है?

सूरसागर का मंगलाचरण — मैं हरि के चरण कमलों की वंदना करता हूँ, जिनकी कृपा से लंगड़ा पहाड़ लाँघ जाता है, अंधे को सब दिखने लगता है, बहरा सुनने लगता है, गूँगा बोलने लगता है और गरीब राजा बन जाता है।

चैनल से जुड़ें