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दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र — पूरा पाठ और हिंदी अर्थ

दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र महर्षि वसिष्ठ की रचना है। हर श्लोक ‘दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय’ पर खत्म होता है — यानी गरीबी के दुःख को जला देने वाले शिव को नमस्कार।

सोमवार और प्रदोष पर, सुबह-शाम-दोपहर तीनों संध्याओं में — साथ में शिव चालीसा।

दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र — पूरा पाठ और हिंदी अर्थ
१

विश्वेश्वराय नरकार्णवतारणाय कर्णामृताय शशिशेखरधारणाय। कर्पूरकान्तिधवलाय जटाधराय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥

विश्व के ईश्वर, नरक-सागर से तारने वाले, कानों के लिए अमृत जैसे, सिर पर चंद्रमा धारण करने वाले, कपूर जैसे उजले, जटाधारी — दरिद्रता के दुःख को जलाने वाले शिव को नमस्कार।

२

गौरीप्रियाय रजनीशकलाधराय कालान्तकाय भुजगाधिपकङ्कणाय। गङ्गाधराय गजराजविमर्दनाय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥

गौरी के प्रिय, चंद्रकला धारण करने वाले, काल का भी अंत करने वाले, नागराज को कंगन बनाने वाले, गंगाधर, गजासुर का मर्दन करने वाले — दरिद्रता का दुःख जलाने वाले शिव को नमस्कार।

३

भक्तिप्रियाय भवरोगभयापहाय उग्राय दुर्गभवसागरतारणाय। ज्योतिर्मयाय गुणनामसुनृत्यकाय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥

भक्ति के प्रेमी, संसार-रूपी रोग और भय को हरने वाले, उग्र रूप, कठिन भवसागर से पार कराने वाले, ज्योतिर्मय, सुंदर नृत्य करने वाले — दरिद्रता का दुःख जलाने वाले शिव को नमस्कार।

४

चर्माम्बराय शवभस्मविलेपनाय भालेक्षणाय मणिकुण्डलमण्डिताय। मञ्जीरपादयुगलाय जटाधराय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥

खाल के वस्त्र पहनने वाले, चिता-भस्म लगाने वाले, माथे पर तीसरी आँख वाले, मणि-कुंडलों से सजे, दोनों पैरों में पायल पहने जटाधारी — दरिद्रता का दुःख जलाने वाले शिव को नमस्कार।

५

पञ्चाननाय फणिराजविभूषणाय हेमांशुकाय भुवनत्रयमण्डिताय। आनन्दभूमिवरदाय तमोमयाय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥

पाँच मुख वाले, नागराज से सजे, सुनहरे वस्त्र वाले, तीनों लोकों को शोभित करने वाले, आनंद-भूमि (काशी) में वर देने वाले, तमोगुण के स्वामी — दरिद्रता का दुःख जलाने वाले शिव को नमस्कार।

६

भानुप्रियाय भवसागरतारणाय कालान्तकाय कमलासनपूजिताय। नेत्रत्रयाय शुभलक्षणलक्षिताय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥

सूर्य के प्रिय, भवसागर से तारने वाले, काल के अंतक, ब्रह्मा द्वारा पूजित, तीन नेत्रों वाले, शुभ लक्षणों से युक्त — दरिद्रता का दुःख जलाने वाले शिव को नमस्कार।

७

रामप्रियाय रघुनाथवरप्रदाय नागप्रियाय नरकार्णवतारणाय। पुण्येषु पुण्यभरिताय सुरार्चिताय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥

राम के प्रिय, रघुनाथ को वर देने वाले, नागों के प्रिय, नरक-सागर से तारने वाले, पुण्यों से भरे, देवताओं द्वारा पूजित — दरिद्रता का दुःख जलाने वाले शिव को नमस्कार।

८

मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय गीतप्रियाय वृषभेश्वरवाहनाय। मातङ्गचर्मवसनाय महेश्वराय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय॥

मुक्ति के स्वामी, फल देने वाले, गणों के ईश्वर, संगीत-प्रेमी, नंदी पर सवार, हाथी की खाल पहनने वाले महेश्वर — दरिद्रता का दुःख जलाने वाले शिव को नमस्कार।

९

वसिष्ठेन कृतं स्तोत्रं सर्वरोगनिवारणम्। सर्वसम्पत्करं शीघ्रं पुत्रपौत्रादिवर्धनम्। त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नित्यं स हि स्वर्गमवाप्नुयात्॥

वसिष्ठ ऋषि का रचा यह स्तोत्र सारे रोग दूर करता है, जल्दी ही हर तरह की संपत्ति देता है और वंश बढ़ाता है; जो इसे रोज़ तीनों संध्याओं में पढ़ता है, वह स्वर्ग पाता है।

दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र का पाठ पूरा हुआ।

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पाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।

Daridrya Dahan Shiv Stotra — Lyrics in English

अंग्रेज़ी अक्षरों (Roman Hindi) में पढ़ें

Vishveshvaray narakarnavatarnay
Karnamritay shashishekharadharnay ।
Karpurakantidhavlay jatadhray
Daridryaduhkhadahnay namah shivay ॥

Gauripriyay rajanishakaladhray
Kalantakay bhujagadhipakankanay ।
Gangadhray gajarajavimardanay
Daridryaduhkhadahnay namah shivay ॥

Bhaktipriyay bhavarogabhayaphay
Ugray durgabhavasagaratarnay ।
Jyotirmayay gunanamasunrityakay
Daridryaduhkhadahnay namah shivay ॥

Charmambaray shavabhasmavilepnay
Bhalekshanay manikundalamanditay ।
Manjirapadayuglay jatadhray
Daridryaduhkhadahnay namah shivay ॥

Panchannay phanirajavibhushnay
Hemanshukay bhuvanatrayamanditay ।
Anandabhumivarday tamomyay
Daridryaduhkhadahnay namah shivay ॥

Bhanupriyay bhavasagaratarnay
Kalantakay kamalasanapujitay ।
Netratrayay shubhalakshanalakshitay
Daridryaduhkhadahnay namah shivay ॥

Ramapriyay raghunathavarapraday
Nagapriyay narakarnavatarnay ।
Punyeshu punyabharitay surarchitay
Daridryaduhkhadahnay namah shivay ॥

Mukteshvaray phalday ganeshvaray
Gitapriyay vrishabheshvaravahnay ।
Matangacharmavasnay maheshvaray
Daridryaduhkhadahnay namah shivay ॥

Vasishthen kritan stotran sarvaroganivaranam ।
Sarvasampatkaran shighran putrapautradivardhanam ।
Trisandhyan yah pathennityan sa hi swargamavapnuyat ॥

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दारिद्र्य दहन स्तोत्र किसने लिखा?

महर्षि वसिष्ठ ने; अंतिम श्लोक में यही लिखा है और तीनों संध्याओं में पाठ का फल बताया गया है।

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