दशरथ कृत शनि स्तोत्र — नमः कृष्णाय नीलाय, अर्थ सहित
पद्म पुराण के अनुसार राजा दशरथ ने यह स्तोत्र गाकर शनिदेव को प्रसन्न किया था, और शनि ने वचन दिया कि इसे पढ़ने वालों को वे पीड़ा नहीं देंगे।
शनिवार को पीपल के नीचे दीपक जलाकर इसका पाठ करें।

नमः कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठनिभाय च। नमः कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नमः॥
काले, नीले, नीलकंठ जैसे वर्ण वाले, प्रलय की अग्नि जैसे और यम रूप शनिदेव को नमस्कार।
नमो निर्मांसदेहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च। नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते॥
दुबले शरीर वाले, लंबी दाढ़ी-जटाओं वाले, बड़ी आँखों वाले, सूखे पेट वाले और भयानक आकृति वाले शनिदेव को नमस्कार।
नमः पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ वै नमः। नमो दीर्घाय शुष्काय कालदंष्ट्र नमोऽस्तु ते॥
विशाल शरीर वाले, मोटे रोम वाले, लंबे, सूखे और काल जैसी दाढ़ों वाले शनिदेव, आपको नमस्कार।
नमस्ते कोटराक्षाय दुर्निरीक्ष्याय वै नमः। नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने॥
गहरी आँखों वाले, जिन्हें देख पाना कठिन है, घोर, रौद्र, भीषण और कपाल धारण करने वाले शनिदेव को नमस्कार।
नमस्ते सर्वभक्षाय बलीमुख नमोऽस्तु ते। सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करेऽभयदाय च॥
सबको खा जाने वाले, बलवान मुख वाले, सूर्यपुत्र और अभय देने वाले शनिदेव, आपको नमस्कार।
अधोदृष्टे नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तु ते। नमो मन्दगते तुभ्यं निस्त्रिंशाय नमोऽस्तुते॥
नीचे देखने वाले, प्रलय करने वाले, धीमी चाल वाले और तलवार जैसे तीखे शनिदेव, आपको नमस्कार।
तपसा दग्धदेहाय नित्यं योगरताय च। नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नमः॥
तप से तपे शरीर वाले, सदा योग में लगे रहने वाले, सदा भूखे और कभी तृप्त न होने वाले शनिदेव को नमस्कार।
ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मजसूनवे। तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात्॥
ज्ञान रूपी आँख वाले, कश्यप के पौत्र (सूर्य के पुत्र), आपको नमस्कार; आप प्रसन्न होकर राज्य दे देते हैं और रूठकर उसी क्षण छीन लेते हैं।
देवासुरमनुष्याश्च सिद्धविद्याधरोरगाः। त्वया विलोकिताः सर्वे नाशं यान्ति समूलतः॥
देवता, असुर, मनुष्य, सिद्ध, विद्याधर और नाग — आपकी (क्रूर) दृष्टि पड़ते ही सब जड़ से नष्ट हो जाते हैं।
प्रसादं कुरु मे सौरे वरदो भव भास्करे। एवं स्तुतस्तदा सौरिर्ग्रहराजो महाबलः॥
हे सूर्यपुत्र, मुझ पर कृपा कीजिए और वर दीजिए — (राजा दशरथ के) इस प्रकार स्तुति करने पर महाबली ग्रहराज शनि प्रसन्न हुए।
दशरथ कृत शनि स्तोत्र का पाठ पूरा हुआ।
किसी अपने को WhatsApp पर भेजेंपाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।


