ग्रहण के नियम
परंपरा के अनुसार ग्रहण से पहले सूतक लगता है (सूर्य ग्रहण में 12 घंटे, चंद्र ग्रहण में 9 घंटे), जिसमें पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श और भोजन पकाने-खाने से बचा जाता है। ग्रहण के बाद स्नान और दान किया जाता है।

✅ क्या करें
- ग्रहण के दौरान मंत्र जप और ध्यान करें।
- पहले से बने भोजन, दूध और पानी में तुलसी दल डाल दें।
- ग्रहण ख़त्म होने के बाद स्नान करें और घर में गंगाजल छिड़कें।
- ग्रहण के बाद अनाज, कपड़े आदि का दान करें।
❌ क्या न करें
- सूतक में मूर्तियों को स्पर्श और मंदिर में पूजा न करें।
- ग्रहण के दौरान भोजन बनाने और खाने से बचें (बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमारों पर यह नियम लागू नहीं)।
- सूर्य ग्रहण को नंगी आँखों से कभी न देखें — इससे आँखों को स्थायी नुकसान हो सकता है।
- जो ग्रहण आपके इलाके में दिखाई न दे, उसका सूतक नहीं माना जाता।
ये नियम परंपरा और मान्यताओं पर आधारित हैं; अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इनमें अंतर हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ग्रहण का सूतक कितने घंटे पहले लगता है?
सूर्य ग्रहण में 12 घंटे और चंद्र ग्रहण में 9 घंटे पहले।
क्या भारत में न दिखने वाले ग्रहण का सूतक मानना चाहिए?
नहीं, परंपरा के अनुसार सूतक तभी माना जाता है जब ग्रहण आपके स्थान पर दिखाई दे।
