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श्री हनुमान स्तवन (हनुमन्नमस्कार) — पूरा पाठ और हिंदी अर्थ

हनुमान स्तवन हनुमान जी के प्रसिद्ध वंदना-श्लोकों का संग्रह है; पहला दोहा और ‘अतुलितबलधामं’ तुलसीदास के रामचरितमानस से हैं, बाकी पारंपरिक संस्कृत श्लोक हैं। सुंदरकांड और हनुमान चालीसा से पहले इसका पाठ किया जाता है।

मंगलवार, शनिवार और सुंदरकांड से पहले — साथ में हनुमान चालीसा और संकटमोचन हनुमानाष्टक।

श्री हनुमान स्तवन (हनुमन्नमस्कार) — पूरा पाठ और हिंदी अर्थ

प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यानघन। जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर॥

मैं पवनपुत्र हनुमान को प्रणाम करता हूँ, जो दुष्टों के वन को जलाने वाली आग जैसे और ज्ञान से भरे हैं; जिनके हृदय रूपी घर में धनुष-बाण धारी श्रीराम निवास करते हैं। (रामचरितमानस, बालकांड)

१

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥

अतुलनीय बल के धाम, सोने के पर्वत जैसे शरीर वाले, राक्षसों के वन के लिए अग्नि, ज्ञानियों में सबसे आगे, सब गुणों के भंडार, वानरों के स्वामी, श्रीराम के प्रिय भक्त पवनपुत्र को मैं नमस्कार करता हूँ। (रामचरितमानस, सुंदरकांड)

२

गोष्पदीकृतवारीशं मशकीकृतराक्षसम्। रामायणमहामालारत्नं वन्देऽनिलात्मजम्॥

जिन्होंने समुद्र को गाय के खुर के गड्ढे जितना छोटा बना दिया और राक्षसों को मच्छर जैसा तुच्छ कर दिया, जो रामायण रूपी महामाला के रत्न हैं — उन पवनपुत्र की मैं वंदना करता हूँ।

३

अञ्जनानन्दनं वीरं जानकीशोकनाशनम्। कपीशमक्षहन्तारं वन्दे लङ्काभयङ्करम्॥

अंजनी के पुत्र, वीर, सीता माता का शोक मिटाने वाले, वानरों के स्वामी, रावण-पुत्र अक्षकुमार को मारने वाले और लंका को भयभीत करने वाले हनुमान की मैं वंदना करता हूँ।

४

उल्लङ्घ्य सिन्धोः सलिलं सलीलं यः शोकवह्निं जनकात्मजायाः। आदाय तेनैव ददाह लङ्कां नमामि तं प्राञ्जलिराञ्जनेयम्॥

जिन्होंने खेल-खेल में समुद्र का जल लाँघ लिया, और सीता माता के शोक की आग लेकर उसी से लंका जला दी — उन अंजनी-नंदन को मैं हाथ जोड़कर नमस्कार करता हूँ।

५

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥

मन जैसी गति और हवा जैसे वेग वाले, इंद्रियों को जीतने वाले, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, पवन-पुत्र, वानर-सेना के प्रमुख श्रीराम-दूत की मैं शरण लेता हूँ।

६

आञ्जनेयमतिपाटलाननं काञ्चनाद्रिकमनीयविग्रहम्। पारिजाततरुमूलवासिनं भावयामि पवमाननन्दनम्॥

गहरे लाल मुख वाले, सोने के पर्वत जैसे सुंदर शरीर वाले, पारिजात वृक्ष की जड़ में निवास करने वाले अंजनी-पुत्र, पवन-नंदन का मैं ध्यान करता हूँ।

७

यत्र यत्र रघुनाथकीर्तनं तत्र तत्र कृतमस्तकाञ्जलिम्। बाष्पवारिपरिपूर्णलोचनं मारुतिं नमत राक्षसान्तकम्॥

जहाँ-जहाँ श्रीराम का कीर्तन होता है, वहाँ-वहाँ सिर पर हाथ जोड़े, आँखों में प्रेम के आँसू भरे हनुमान जी मौजूद रहते हैं — राक्षसों का अंत करने वाले उन मारुति को नमस्कार करो।

श्री हनुमान स्तवन (हनुमन्नमस्कार) का पाठ पूरा हुआ।

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पाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।

Shri Hanuman Stavan (Hanumannamaskar) — Lyrics in English

अंग्रेज़ी अक्षरों (Roman Hindi) में पढ़ें

Pranavaun pavanakumar khal ban pavak gyanghan ।
Jasu hriday agar bashin ram sar chap dhar ॥

Atulitabaldham hemashailabhdeh
Danujavanakrishanun gyaninamagraganyam ।
Sakalagunanidhanan vanaranamdhish
Raghupatipriyabhaktan vatjat namami ॥

Goshpadikritavarishan mashakikritarakshasam ।
Ramayanamahamalaratnan vande'nilatmajam ॥

Anjananandanan viran janakishokanashanam ।
Kapishamakshahantaran vande lankabhayankaram ॥

Ullanghya sindhoh salilan salilan
Yah shokavahnin janakatmajayah ।
Aday tenaiv dadah lankan
Namami tan pranjaliranjaneyam ॥

Manojavan marutatulyavegan
Jitendriyan buddhimtan varishtham ।
Vatatmajan vanarayuthamukhyan
Shriramdut sharanan prapadye ॥

Anjaneyamatipatalananan
Kanchanadrikamaniyavigraham ।
Parijatatarumulavasinan
Bhavyami pavamananandanam ॥

Yatra yatra raghunathakirtanan
Tatra tatra kritamastakanjalim ।
Bashpavariparipurnalochanan
Marutin namat rakshasantakam ॥

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

हनुमान स्तवन कब पढ़ें?

हनुमान चालीसा या सुंदरकांड पाठ शुरू करने से पहले, और मंगलवार-शनिवार की पूजा में।

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