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कबहुँक हौं यहि रहनि रहौंगो — तुलसीदास — पूरे बोल और भावार्थ

‘कबहुँक हौं यहि रहनि रहौंगो’ तुलसीदास की रचना है। तुलसीदास कामना करते हैं — क्या कभी मैं संतों जैसा जीवन जी पाऊँगा? जो मिले उसी में संतोष, किसी से कुछ न चाहना, सदा दूसरों का भला करना, कठोर वचन सुनकर भी न जलना, दूसरों के गुण देखना और दोष न कहना, सुख-दुख को समान भाव से सहना — इसी रास्ते पर चलकर अटल हरि-भक्ति पाऊँगा।

तुलसीदास की रचना। सभी संत भजन।

पाठभेद: यह पाठ प्रचलित संस्करणों से लिया गया है; अलग-अलग पुस्तकों और गायकों में कुछ शब्द अलग मिलते हैं। हम इसे मुद्रित संस्करण से मिलान कर रहे हैं।

कबहुँक हौं यहि रहनि रहौंगो — तुलसीदास — पूरे बोल और भावार्थ

कबहुँक हौं यहि रहनि रहौंगो। श्री रघुनाथ-कृपालु-कृपा तें, संत-सुभाव गहौंगो॥ जथालाभ संतोष सदा, काहू सों कछु न चहौंगो। परहित-निरत निरंतर, मन क्रम बचन नेम निबहौंगो॥ परुष बचन अति दुसह स्रवन सुनि, तेहि पावक न दहौंगो। बिगत मान, सम सीतल मन, पर-गुन, नहिं दोष कहौंगो॥ परिहरि देह-जनित चिंता, दुख-सुख समबुद्धि सहौंगो। तुलसिदास प्रभु यहि पथ रहि, अबिचल हरि-भक्ति लहौंगो॥

भावार्थ: तुलसीदास कामना करते हैं — क्या कभी मैं संतों जैसा जीवन जी पाऊँगा? जो मिले उसी में संतोष, किसी से कुछ न चाहना, सदा दूसरों का भला करना, कठोर वचन सुनकर भी न जलना, दूसरों के गुण देखना और दोष न कहना, सुख-दुख को समान भाव से सहना — इसी रास्ते पर चलकर अटल हरि-भक्ति पाऊँगा।

कबहुँक हौं यहि रहनि रहौंगो — तुलसीदास का पाठ पूरा हुआ।

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पाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।

Kabhunk Haun Yahi Rahni Rahaungo — Lyrics in English

अंग्रेज़ी अक्षरों (Roman Hindi) में पढ़ें

Kabhunk haun yahi rahni rahaungo ।
Shri raghunath-kripalu-kripa ten, sant-subhav gahaungo ॥
Jathalabh santosh sada, kahu son kachhu na chahaungo ।
Parhit-nirat nirantar, man kram bachan nem nibhaungo ॥
Parush bachan ati dusah sravan suni, tehi pavak na dahaungo ।
Bigat man, sam sital man, par-gun, nahin dosh kahaungo ॥
Parihri deh-janit chinta, dukh-sukh samabuddhi sahaungo ।
Tulasidas prabhu yahi path rahi, abichal hari-bhakti lahaungo ॥

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

‘कबहुँक हौं यहि रहनि रहौंगो’ किसने लिखा?

तुलसीदास ने।

‘कबहुँक हौं यहि रहनि रहौंगो’ का अर्थ क्या है?

तुलसीदास कामना करते हैं — क्या कभी मैं संतों जैसा जीवन जी पाऊँगा? जो मिले उसी में संतोष, किसी से कुछ न चाहना, सदा दूसरों का भला करना, कठोर वचन सुनकर भी न जलना, दूसरों के गुण देखना और दोष न कहना, सुख-दुख को समान भाव से सहना — इसी रास्ते पर चलकर अटल हरि-भक्ति पाऊँगा।

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