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महामृत्युंजय मंत्र — अर्थ सहित

महामृत्युंजय मंत्र ऋग्वेद (7.59.12) का मंत्र है, जिसमें तीन नेत्रों वाले शिव से मृत्यु के बंधन से मुक्ति और अमृत की प्रार्थना है। इसे रोग, भय और संकट दूर करने वाला माना जाता है।

सोमवार, सावन और किसी परिजन के अस्वस्थ होने पर इसका 108 बार जाप किया जाता है।

महामृत्युंजय मंत्र — अर्थ सहित
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ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

हम तीन नेत्रों वाले शिव की पूजा करते हैं, जो सुगंधित हैं और सबका पोषण बढ़ाते हैं। जैसे पका हुआ खीरा बेल से अपने आप छूट जाता है, वैसे ही हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें, अमरता (मोक्ष) से नहीं।

महामृत्युंजय मंत्र का पाठ पूरा हुआ।

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पाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।

Mahamrityunjay Mantra — Lyrics in English

अंग्रेज़ी अक्षरों (Roman Hindi) में पढ़ें

Om tryambakan yajamhe
Sugandhin pushtivardhanam ।
Urvarukmiv bandhanan
Mrityormukshiy ma'mritat ॥

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ क्या है?

‘हम तीन नेत्रों वाले शिव की पूजा करते हैं। जैसे पका खीरा बेल से अपने-आप छूट जाता है, वैसे ही वे हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें।’

महामृत्युंजय मंत्र कितनी बार जपें?

एक माला यानी 108 बार; हमारा 108 बार वाला वीडियो साथ में सुनें।

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