OmKiran BhaktiOmKiran Bhaktiभजन, आरती, चालीसा और मंत्र

मो सम कौन कुटिल खल कामी — सूरदास — पूरे बोल और भावार्थ

‘मो सम कौन कुटिल खल कामी’ सूरदास की रचना है। सूरदास विनय भाव में कहते हैं — मेरे जैसा कुटिल, दुष्ट और कामी कौन है? जिस प्रभु ने यह शरीर दिया, उसी को भूल गया। सूरदास अपने दोष मानकर प्रभु की शरण माँगते हैं — यह पद आत्म-निवेदन की भक्ति का उदाहरण है।

सूरदास की रचना। सभी संत भजन।

पाठभेद: यह पाठ प्रचलित संस्करणों से लिया गया है; अलग-अलग पुस्तकों और गायकों में कुछ शब्द अलग मिलते हैं। हम इसे मुद्रित संस्करण से मिलान कर रहे हैं।

मो सम कौन कुटिल खल कामी — सूरदास — पूरे बोल और भावार्थ

मो सम कौन कुटिल खल कामी। जेहिं तनु दियौ ताहिं बिसरायौ, ऐसौ नोनहरामी॥ भरि भरि उदर बिषय कौं धावौं, जैसे सूकर ग्रामी। हरिजन छाँड़ि हरी-बिमुखन की, निसदिन करत गुलामी॥ पापी कौन बड़ो है मोतें, सब पतितन में नामी। सूर पतित कौं ठौर कहाँ है, सुनिए श्रीपति स्वामी॥

भावार्थ: सूरदास विनय भाव में कहते हैं — मेरे जैसा कुटिल, दुष्ट और कामी कौन है? जिस प्रभु ने यह शरीर दिया, उसी को भूल गया। सूरदास अपने दोष मानकर प्रभु की शरण माँगते हैं — यह पद आत्म-निवेदन की भक्ति का उदाहरण है।

मो सम कौन कुटिल खल कामी — सूरदास का पाठ पूरा हुआ।

किसी अपने को WhatsApp पर भेजें

पाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।

Mo Sam Kaun Kutil Khal Kami — Lyrics in English

अंग्रेज़ी अक्षरों (Roman Hindi) में पढ़ें

Mo sam kaun kutil khal kami ।
Jehin tanu diyau tahin bisrayau, aisau nonahrami ॥
Bhari bhari udar bishay kaun dhavaun, jaise sukar grami ।
Harijan chhanri hari-bimukhan ki, nisdin karat gulami ॥
Papi kaun baro hai moten, sab patitan men nami ।
Sur patit kaun thaur kahan hai, sunie shripti swami ॥

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

‘मो सम कौन कुटिल खल कामी’ किसने लिखा?

सूरदास ने।

‘मो सम कौन कुटिल खल कामी’ का अर्थ क्या है?

सूरदास विनय भाव में कहते हैं — मेरे जैसा कुटिल, दुष्ट और कामी कौन है? जिस प्रभु ने यह शरीर दिया, उसी को भूल गया। सूरदास अपने दोष मानकर प्रभु की शरण माँगते हैं — यह पद आत्म-निवेदन की भक्ति का उदाहरण है।

चैनल से जुड़ें