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पापांकुशा एकादशी व्रत कथा

पापांकुशा एकादशी की कथा विंध्य पर्वत पर रहने वाले क्रोधन नाम के क्रूर बहेलिये की है, जिसने जीवन के आख़िरी दिनों में अंगिरा ऋषि के कहने पर यह व्रत रखा और उसके सारे पाप नष्ट हो गए।

पापांकुशा एकादशी 2026: 22 अक्टूबर 2026, गुरुवार — तिथि और पूजा का समय देखें

पापांकुशा एकादशी व्रत कथा

क्रोधन बहेलिये की कथा

विंध्य पर्वत पर क्रोधन नाम का एक बहेलिया रहता था। वह जीवन भर हिंसा, चोरी और बुरे कामों में लगा रहा। जब उसका आख़िरी समय पास आया, तो एक रात सपने में उसे यमदूत दिखे जो उसे ले जाने की बात कर रहे थे।

डर से काँपता हुआ क्रोधन सुबह अंगिरा ऋषि के आश्रम पहुँचा और उनके चरणों में गिरकर बोला, ‘मुनिवर, मैंने जीवन भर पाप किए हैं। कोई ऐसा उपाय बताइए जिससे मुझे नरक न जाना पड़े।’

ऋषि ने कहा, ‘आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी — पापांकुशा एकादशी — का व्रत पूरी श्रद्धा से करो और भगवान पद्मनाभ की पूजा करो। यह एकादशी पापों पर अंकुश लगाती है।’

क्रोधन ने ऋषि की बताई विधि से व्रत किया, दिन भर भगवान का नाम लिया और रात को जागरण किया। इस व्रत के प्रभाव से उसके सारे पाप नष्ट हो गए और अंत में वह विष्णु लोक को गया।

कथा की सीख

सच्चे मन से की गई प्रार्थना और पश्चाताप कभी व्यर्थ नहीं जाते। इसीलिए इस एकादशी को ‘पाप पर अंकुश’ लगाने वाली कहा गया है।

यह कथा पारंपरिक कथा का OmKiran Bhakti द्वारा सरल हिंदी में किया गया पुनर्कथन है; अलग-अलग क्षेत्रों में कथा के विवरण में थोड़ा अंतर मिलता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पापांकुशा एकादशी पर किसकी पूजा होती है?

भगवान विष्णु के पद्मनाभ रूप की।

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