पितृ पक्ष के नियम
पितृ पक्ष (श्राद्ध) के 16 दिनों में पितरों का तर्पण, श्राद्ध और दान किया जाता है। इन दिनों विवाह, गृह प्रवेश, नई ख़रीदारी जैसे शुभ काम और तामसिक भोजन से परहेज़ किया जाता है।

✅ क्या करें
- पितर की तिथि पर श्राद्ध और तर्पण करें; तिथि याद न हो तो सर्वपितृ अमावस्या पर।
- दोपहर (कुतुप काल) में श्राद्ध करें।
- गाय, कौवे, कुत्ते और चींटी के लिए भोजन निकालें (पंचबलि)।
- ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन और दान दें।
- सात्विक भोजन करें।
❌ क्या न करें
- विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन न करें।
- नए कपड़े, गहने, गाड़ी या मकान ख़रीदने से बचें।
- प्याज़, लहसुन, मांस-मदिरा न लें।
- श्राद्ध के भोजन में लोहे के बर्तन का उपयोग न करें।
- किसी का अपमान, ख़ासकर बुज़ुर्गों का, न करें।
ये नियम परंपरा और मान्यताओं पर आधारित हैं; अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इनमें अंतर हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पितृ पक्ष में कौवे को खाना क्यों देते हैं?
मान्यता है कि कौवे के माध्यम से भोजन पितरों तक पहुँचता है।
श्राद्ध की तिथि याद न हो तो क्या करें?
सर्वपितृ अमावस्या (पितृ पक्ष का आख़िरी दिन) को सभी पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है।
