शांति मंत्र — ॐ पूर्णमदः, असतो मा सद्गमय, द्यौः शान्ति — अर्थ सहित
शांति मंत्र किसी भी पूजा, पाठ या पढ़ाई की शुरुआत और अंत में बोले जाते हैं; हर मंत्र ‘ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः’ पर खत्म होता है — तीनों तरह के कष्टों की शांति के लिए।

ॐ पूर्णमदः (ईशावास्य उपनिषद्)
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
वह (परमात्मा) पूर्ण है, यह (जगत) भी पूर्ण है; पूर्ण से ही पूर्ण उत्पन्न होता है। पूर्ण में से पूर्ण निकाल लेने पर भी पूर्ण ही बचता है। ॐ शांति, शांति, शांति।
असतो मा सद्गमय (बृहदारण्यक उपनिषद्)
ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
हे प्रभु, मुझे असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर, और मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो।
द्यौः शान्ति (यजुर्वेद 36.17)
ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः। वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
आकाश, अंतरिक्ष, पृथ्वी, जल, औषधियाँ, वनस्पतियाँ, सब देवता और ब्रह्म — सब में शांति हो; सब कुछ शांत हो, और वह शांति मुझे भी मिले।
सर्वे भवन्तु सुखिनः
ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
सब सुखी हों, सब रोगमुक्त हों, सब शुभ देखें, कोई भी दुखी न हो।
सह नाववतु (कठोपनिषद्)
ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
परमात्मा हम (गुरु-शिष्य) दोनों की रक्षा करें, साथ पोषण करें, हम साथ शक्ति पाएँ, हमारी विद्या तेजस्वी हो और हम आपस में द्वेष न करें।
शांति मंत्र का पाठ पूरा हुआ।
किसी अपने को WhatsApp पर भेजेंपाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।
