शिवलिंग पर क्या चढ़ाएँ, क्या न चढ़ाएँ
शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल और चंदन चढ़ाया जाता है। परंपरा के अनुसार शिवलिंग पर तुलसी, केतकी का फूल, हल्दी, कुमकुम (सिंदूर) और शंख से जल नहीं चढ़ाया जाता।

✅ क्या करें
- तांबे के लोटे से धीरे-धीरे जल या गंगाजल चढ़ाएँ।
- तीन पत्तियों वाला साबुत बेलपत्र, चिकनी तरफ़ नीचे रखकर चढ़ाएँ।
- धतूरा, भांग, आक या कनेर के फूल, सफ़ेद चंदन और अक्षत चढ़ाएँ।
- ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप करें।
- शिवलिंग की आधी परिक्रमा करें — जलधारी (जल निकलने की जगह) तक जाकर लौट आएँ।
❌ क्या न करें
- तुलसी के पत्ते न चढ़ाएँ।
- केतकी (केवड़ा) का फूल न चढ़ाएँ।
- हल्दी और कुमकुम/सिंदूर न लगाएँ।
- शंख से जल न चढ़ाएँ।
- जलधारी को लांघकर पूरी परिक्रमा न करें।
- टूटे या कटे-फटे बेलपत्र न चढ़ाएँ।
ये नियम परंपरा और मान्यताओं पर आधारित हैं; अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इनमें अंतर हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शिवलिंग पर तुलसी क्यों नहीं चढ़ाते?
कथा के अनुसार तुलसी (वृंदा) के पति जालंधर का वध शिव जी ने किया था, इसलिए शिव पूजा में तुलसी वर्जित मानी जाती है।
शिवलिंग की आधी परिक्रमा क्यों करते हैं?
जलधारी से बहने वाला जल पवित्र माना जाता है, उसे लांघा नहीं जाता, इसलिए आधी परिक्रमा की जाती है।
शिवलिंग पर हल्दी क्यों नहीं चढ़ाते?
हल्दी सौंदर्य और सुहाग से जुड़ी मानी जाती है, जबकि शिवलिंग वैराग्य का प्रतीक है।
