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तुलसी के नियम

परंपरा के अनुसार रविवार, एकादशी, अमावस्या, ग्रहण और सूर्यास्त के बाद तुलसी के पत्ते नहीं तोड़े जाते। तुलसी को रोज़ सुबह जल और शाम को दीपक दिया जाता है, और शिव जी व गणेश जी की पूजा में तुलसी नहीं चढ़ाई जाती।

तुलसी के नियम

✅ क्या करें

  • सुबह स्नान के बाद तुलसी को जल चढ़ाएँ।
  • शाम को तुलसी के पास घी का दीपक जलाएँ।
  • पत्ते उँगलियों से धीरे से तोड़ें, पहले प्रणाम करें।
  • विष्णु, कृष्ण और हनुमान जी के भोग में तुलसी दल रखें।
  • सूखी तुलसी को नदी या साफ़ मिट्टी में विसर्जित करें।

❌ क्या न करें

  • रविवार, एकादशी, अमावस्या, ग्रहण और रात में पत्ते न तोड़ें।
  • नाखून से पत्ते न नोचें।
  • शिव जी और गणेश जी को तुलसी न चढ़ाएँ।
  • तुलसी के पौधे के पास गंदगी या जूते-चप्पल न रखें।
  • सूखी तुलसी को कूड़े में न फेंकें।

ये नियम परंपरा और मान्यताओं पर आधारित हैं; अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इनमें अंतर हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रविवार को तुलसी क्यों नहीं तोड़ते?

मान्यता है कि रविवार को तुलसी माता विष्णु जी के लिए व्रत रखती हैं, इसलिए उस दिन पत्ते और जल दोनों से बचा जाता है।

तुलसी पर जल कब नहीं चढ़ाना चाहिए?

कई परंपराओं में रविवार और एकादशी को तुलसी पर जल नहीं चढ़ाया जाता।

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