ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै — संत रैदास — पूरे बोल और भावार्थ
‘ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै’ संत रैदास की रचना है। संत रविदास कहते हैं — हे प्रभु, तुम्हारे बिना ऐसा कौन कर सकता है? तुम गरीबों पर कृपा करने वाले हो, जिसे दुनिया अछूत मानती है उस पर भी दया करते हो और उसके सिर पर छत्र रखते हो। तुम नीच को ऊँचा कर देते हो। नामदेव, कबीर, त्रिलोचन, सधना और सैन जैसे संत तुम्हारी कृपा से तर गए।
संत रैदास की रचना। सभी संत भजन।
पाठभेद: यह पाठ प्रचलित संस्करणों से लिया गया है; अलग-अलग पुस्तकों और गायकों में कुछ शब्द अलग मिलते हैं। हम इसे मुद्रित संस्करण से मिलान कर रहे हैं।

ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै। गरीब निवाजु गुसईआ मेरा, माथै छत्रु धरै॥ जाकी छोति जगत कउ लागै, ता पर तुहीं ढरै। नीचहु ऊच करै मेरा गोबिंदु, काहू ते न डरै॥ नामदेव कबीरु तिलोचनु, सधना सैनु तरै। कहि रविदासु सुनहु रे संतहु, हरि जीउ ते सभै सरै॥
भावार्थ: संत रविदास कहते हैं — हे प्रभु, तुम्हारे बिना ऐसा कौन कर सकता है? तुम गरीबों पर कृपा करने वाले हो, जिसे दुनिया अछूत मानती है उस पर भी दया करते हो और उसके सिर पर छत्र रखते हो। तुम नीच को ऊँचा कर देते हो। नामदेव, कबीर, त्रिलोचन, सधना और सैन जैसे संत तुम्हारी कृपा से तर गए।
ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै — संत रैदास का पाठ पूरा हुआ।
किसी अपने को WhatsApp पर भेजेंपाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।
