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अन्नपूर्णा माता की आरती — बारम्बार प्रणाम, बोल और अर्थ

‘बारम्बार प्रणाम’ माँ अन्नपूर्णा की आरती है। काशी में अन्नपूर्णा मंदिर और घरों में अन्नपूर्णा जयंती (मार्गशीर्ष पूर्णिमा) पर इसे गाया जाता है।

अन्नपूर्णा माता की आरती — बारम्बार प्रणाम, बोल और अर्थ

बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम। जो नहीं ध्यावे तुम्हें अम्बिके, कहां उसे विश्राम॥ अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारो, लेत होत सब काम॥

हे माँ, बार-बार प्रणाम। हे अम्बिके, जो आपका ध्यान नहीं करता, उसे कहाँ विश्राम मिलेगा? अन्नपूर्णा नाम लेने से सब काम बन जाते हैं।

प्रलय युगान्तर और जन्मान्तर, कालान्तर तक नाम। सुर सुरों की रचना करती, कहाँ कृष्ण कहाँ राम॥

प्रलय, युगों, जन्मों और कालों के पार तक आपका नाम रहता है; देवताओं की रचना आप करती हैं, कृष्ण और राम भी आपकी शक्ति से हैं।

चूमहि चरण चतुर चतुरानन, चारु चक्रधर श्याम। चंद्रचूड़ चन्द्रानन चाकर, शोभा लखहि ललाम॥

चतुर ब्रह्मा और सुंदर चक्रधारी श्याम आपके चरण चूमते हैं; चंद्रमा धारण करने वाले शिव भी सेवक बनकर आपकी सुंदर शोभा देखते हैं।

देवि देव दयनीय दशा में, दया दया तब नाम। त्राहि त्राहि शरणागत वत्सल, शरण रूप तब धाम॥

हे देवी, देवता भी दयनीय दशा में आपका 'दया-दया' नाम पुकारते हैं; हे शरणागत-वत्सला, रक्षा कीजिए, आपका धाम ही शरण है।

श्रीं ह्रीं श्रद्धा श्री ऐं विद्या, श्री क्लीं कमला काम। कांति भ्रांतिमयी कांति शांतिमयी, वर दे तू निष्काम॥

आप ‘श्रीं’ और ‘ह्रीं’ रूप में श्रद्धा, ‘ऐं’ रूप में विद्या और ‘क्लीं’ रूप में लक्ष्मी हैं; हे कांति और शांति से भरी माँ, निष्काम भक्ति का वर दीजिए।

अन्नपूर्णा माता की आरती का पाठ पूरा हुआ।

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पाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।

Annapurna Mata Ki Arti — Lyrics in English

अंग्रेज़ी अक्षरों (Roman Hindi) में पढ़ें

Barambar pranam, maiya barambar pranam ।
Jo nahin dhyave tumhen ambike, kahan use vishram ॥
Annapurna devi nam tiharo, let hot sab kam ॥

Pralay yugantar aur janmantar, kalantar tak nam ।
Sur suron ki rachna karti, kahan krishna kahan ram ॥

Chumhi charan chatur chaturanan, charu chakradhar shyam ।
Chandrachur chandranan chakar, shobha lakhhi lalam ॥

Devi dev dayniy dasha men, daya daya tab nam ।
Trahi trahi sharanagat vatsal, sharan rup tab dham ॥

Shrin hrin shraddha shri ain vidya, shri klin kamla kam ।
Kanti bhrantimyi kanti shantimyi, var de tu nishkam ॥

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