OmKiran BhaktiOmKiran Bhaktiभजन, आरती, चालीसा और मंत्र

भजो रे भैया राम गोविंद हरी — कबीरदास — पूरे बोल और भावार्थ

‘भजो रे भैया राम गोविंद हरी’ कबीरदास की रचना है। कबीर कहते हैं — भाई, राम-गोविंद-हरि का भजन करो। इसमें न जप-तप लगता है, न कोई साधन, न जेब से कुछ ख़र्च होता है। लोग धन और सुख के पीछे भूल में पड़े हैं; जिस मुख में राम नहीं, उस मुख में धूल है।

कबीरदास की रचना। सभी संत भजन।

पाठभेद: यह पाठ प्रचलित संस्करणों से लिया गया है; अलग-अलग पुस्तकों और गायकों में कुछ शब्द अलग मिलते हैं। हम इसे मुद्रित संस्करण से मिलान कर रहे हैं।

भजो रे भैया राम गोविंद हरी — कबीरदास — पूरे बोल और भावार्थ

भजो रे भैया राम गोविंद हरी। जप तप साधन कछु नहिं लागत, खरचत नहिं गठरी॥ संतत संपत सुख के कारन, जासे भूल परी। कहत कबीर राम नहिं जा मुख, ता मुख धूल भरी॥

भावार्थ: कबीर कहते हैं — भाई, राम-गोविंद-हरि का भजन करो। इसमें न जप-तप लगता है, न कोई साधन, न जेब से कुछ ख़र्च होता है। लोग धन और सुख के पीछे भूल में पड़े हैं; जिस मुख में राम नहीं, उस मुख में धूल है।

भजो रे भैया राम गोविंद हरी — कबीरदास का पाठ पूरा हुआ।

किसी अपने को WhatsApp पर भेजें

पाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।

Bhajo Re Bhaiya Ram Govind Hari — Lyrics in English

अंग्रेज़ी अक्षरों (Roman Hindi) में पढ़ें

Bhajo re bhaiya ram govind hari ।
Jap tap sadhan kachhu nahin lagat, kharchat nahin gathri ॥
Santat sanpat sukh ke karan, jase bhul pari ।
Kahat kabir ram nahin ja mukh, ta mukh dhul bhari ॥

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

‘भजो रे भैया राम गोविंद हरी’ किसने लिखा?

कबीरदास ने।

‘भजो रे भैया राम गोविंद हरी’ का अर्थ क्या है?

कबीर कहते हैं — भाई, राम-गोविंद-हरि का भजन करो। इसमें न जप-तप लगता है, न कोई साधन, न जेब से कुछ ख़र्च होता है। लोग धन और सुख के पीछे भूल में पड़े हैं; जिस मुख में राम नहीं, उस मुख में धूल है।

चैनल से जुड़ें