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छठ गीत: पारंपरिक लोकगीत, उनका अर्थ और भजन

छठ के गीत ज़्यादातर भोजपुरी, मैथिली और मगही की लोक परंपरा से आते हैं और घर की महिलाएँ इन्हें पीढ़ियों से गाती आई हैं। सबसे मशहूर हैं ‘कांच ही बांस के बहंगिया’, ‘केलवा जे फरेला घवद से’ और ‘उग हो सूरज देव’। नीचे इनका सरल अर्थ, गाने का समय और हमारा छठ पूजा भजन वीडियो है।

OmKiran Bhakti के छठ पूजा भजन

छठ के मशहूर पारंपरिक गीत

गीतकिस बारे में हैकब गाते हैं
कांच ही बांस के बहंगियाबाँस की बहंगी में प्रसाद लेकर घाट जाने का वर्णन; बोझ से बहंगी लचकती है पर श्रद्धा नहीं थकतीघाट जाते समय
केलवा जे फरेला घवद सेकेले के घौद पर मँडराते सुग्गे की कहानी: छठी मैया के प्रसाद को जूठा करने से बचाने का भावप्रसाद बनाते समय और घाट पर
उग हो सूरज देवभोर में व्रती सूर्य देव से उगने की विनती करते हैं, क्योंकि अर्घ्य की बेला हो गई हैउषा अर्घ्य से पहले
जोड़े जोड़े सुपवाजोड़े में सूप और फल लेकर छठी मैया को अर्पित करने का भावसंध्या और उषा अर्घ्य पर
हे दीनानाथ / हो दीनानाथसूर्य देव को ‘दीनों के नाथ’ कहकर पुकारना और कृपा माँगनाघाट पर, अर्घ्य के समय

इन गीतों में क्या ख़ास है

  • इनमें छठी मैया और सूर्य देव से बातचीत जैसा भाव होता है: व्रती संतान, पति और घर के सुख की सीधी-सादी प्रार्थना करती हैं।
  • बहंगी, सूप, दउरा, गन्ना, केला जैसी चीज़ें गीतों में बार-बार आती हैं, यानी पूजा की सारी तैयारी गीत में ही सुनाई देती है।
  • लोकगीत होने के कारण हर गाँव और परिवार में शब्द थोड़े अलग मिलते हैं। कोई एक ‘सही’ पाठ नहीं है।
  • यहाँ हमने सिर्फ़ गीतों के नाम और अर्थ दिए हैं, किसी कलाकार की रिकॉर्डिंग के पूरे बोल नहीं।

छठ के गीत और शारदा सिन्हा

‘बिहार कोकिला’ शारदा सिन्हा की आवाज़ ने छठ के गीतों को देश-विदेश में घर-घर पहुँचाया। ‘केलवा के पात पर’ और ‘हो दीनानाथ’ जैसे उनके गीत आज भी घाटों पर बजते हैं। उनका निधन नवंबर 2024 में हुआ। उनकी रिकॉर्डिंग उनके आधिकारिक म्यूज़िक लेबल के चैनलों पर सुनें।

कौन सा गीत कब गाएँ

  • नहाय-खाय और खरना: घर की सफ़ाई और प्रसाद की तैयारी के समय छठी मैया के गीत गाए जाते हैं।
  • संध्या अर्घ्य: दउरा लेकर घाट जाते समय ‘कांच ही बांस के बहंगिया’।
  • रात में: कोसी भरते समय और घाट पर जागते हुए छठी मैया के गीत।
  • उषा अर्घ्य: भोर में ‘उग हो सूरज देव’। अर्घ्य के बाद सूर्य देव की आरती भी कर सकते हैं।

जानकारी की जाँच: 27 अक्टूबर 2026। ये परंपराएँ और मान्यताएँ हैं; अपने परिवार की रीति को प्राथमिकता दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

छठ का सबसे प्रसिद्ध गीत कौन सा है?

‘कांच ही बांस के बहंगिया’ और ‘केलवा जे फरेला घवद से’ सबसे ज़्यादा जाने जाते हैं।

बहंगी क्या होती है?

बाँस की वह डंडी जिसके दोनों ओर टोकरियाँ लटकती हैं। छठ में इसी से प्रसाद घाट तक ले जाया जाता था।

उग हो सूरज देव कब गाते हैं?

उषा अर्घ्य से पहले भोर में, जब व्रती सूर्य के उगने की राह देखते हैं।

क्या छठ के गीत शारदा सिन्हा ने लिखे हैं?

छठ के बहुत से गीत लोक परंपरा से आए हैं। शारदा सिन्हा ने इन्हें अपनी आवाज़ से लोकप्रिय किया, और उनके कुछ गीत नए भी लिखे गए हैं।

छठ गीत किस भाषा में होते हैं?

ज़्यादातर भोजपुरी, मैथिली और मगही में।

क्या छठ गीत गाना ज़रूरी है?

कोई सख़्त नियम नहीं है, पर गीत छठ की परंपरा का अहम हिस्सा हैं और महिलाएँ पूजा की तैयारी से घाट तक इन्हें गाती हैं।

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