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दशावतार स्तोत्र (प्रलय पयोधि जले) — पूरा पाठ और हिंदी अर्थ

‘प्रलयपयोधिजले’ कवि जयदेव के गीत गोविंद का पहला गीत है। इसके हर पद में विष्णु के एक अवतार — मत्स्य, कच्छप, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, बलराम, बुद्ध और कल्कि — का वर्णन है और टेक है ‘केशव धृत… जय जगदीश हरे’।

एकादशी और विष्णु-पूजा में — साथ में ॐ जय जगदीश हरे।

दशावतार स्तोत्र (प्रलय पयोधि जले) — पूरा पाठ और हिंदी अर्थ
१

प्रलयपयोधिजले धृतवानसि वेदम् विहितवहित्रचरित्रमखेदम्। केशव धृतमीनशरीर जय जगदीश हरे॥

प्रलय के सागर में आपने बिना थके नाव की तरह वेदों को धारण किया — हे केशव, मत्स्य रूप धारण करने वाले जगदीश हरि, आपकी जय हो।

२

क्षितिरिह विपुलतरे तिष्ठति तव पृष्ठे धरणिधारणकिणचक्रगरिष्ठे। केशव धृतकच्छपरूप जय जगदीश हरे॥

आपकी विशाल पीठ पर, जिस पर पृथ्वी को धारण करने से गोल निशान पड़ गया है, यह धरती टिकी है — हे केशव, कच्छप रूप वाले जगदीश हरि, आपकी जय हो।

३

वसति दशनशिखरे धरणी तव लग्ना शशिनि कलङ्ककलेव निमग्ना। केशव धृतसूकररूप जय जगदीश हरे॥

आपके दाँत की नोक पर टिकी पृथ्वी ऐसी लगती है जैसे चंद्रमा में दाग़ — हे केशव, वराह रूप वाले जगदीश हरि, आपकी जय हो।

४

तव करकमलवरे नखमद्भुतशृङ्गम् दलितहिरण्यकशिपुतनुभृङ्गम्। केशव धृतनरहरिरूप जय जगदीश हरे॥

आपके कमल जैसे हाथ के अद्भुत नुकीले नाखूनों ने हिरण्यकशिपु के शरीर को भौंरे की तरह चीर दिया — हे केशव, नरसिंह रूप वाले जगदीश हरि, आपकी जय हो।

५

छलयसि विक्रमणे बलिमद्भुतवामन पदनखनीरजनितजनपावन। केशव धृतवामनरूप जय जगदीश हरे॥

हे अद्भुत वामन, आपने तीन पग में राजा बलि को छला; आपके पैर के नख से निकली गंगा सबको पवित्र करती है — हे केशव, वामन रूप वाले जगदीश हरि, आपकी जय हो।

६

क्षत्रियरुधिरमये जगदपगतपापम् स्नपयसि पयसि शमितभवतापम्। केशव धृतभृगुपतिरूप जय जगदीश हरे॥

अत्याचारी क्षत्रियों के रक्त से आपने संसार को पाप-मुक्त किया और उसका ताप शांत किया — हे केशव, परशुराम रूप वाले जगदीश हरि, आपकी जय हो।

७

वितरसि दिक्षु रणे दिक्पतिकमनीयम् दशमुखमौलिबलिं रमणीयम्। केशव धृतरामशरीर जय जगदीश हरे॥

युद्ध में आपने रावण के दस सिरों की बलि दिशाओं के स्वामियों को भेंट की — हे केशव, राम रूप वाले जगदीश हरि, आपकी जय हो।

८

वहसि वपुषि विशदे वसनं जलदाभम् हलहतिभीतिमिलितयमुनाभम्। केशव धृतहलधररूप जय जगदीश हरे॥

आप गोरे शरीर पर बादल जैसे नीले वस्त्र पहनते हैं, मानो हल के डर से यमुना आपसे आ मिली हो — हे केशव, बलराम रूप वाले जगदीश हरि, आपकी जय हो।

९

निन्दसि यज्ञविधेरहह श्रुतिजातम् सदयहृदयदर्शितपशुघातम्। केशव धृतबुद्धशरीर जय जगदीश हरे॥

दयालु हृदय से आपने यज्ञों में होने वाली पशु-हिंसा की निंदा की — हे केशव, बुद्ध रूप वाले जगदीश हरि, आपकी जय हो।

१०

म्लेच्छनिवहनिधने कलयसि करवालम् धूमकेतुमिव किमपि करालम्। केशव धृतकल्किशरीर जय जगदीश हरे॥

दुष्टों के समूह के नाश के लिए आप धूमकेतु जैसी भयंकर तलवार उठाते हैं — हे केशव, कल्कि रूप वाले जगदीश हरि, आपकी जय हो।

११

श्रीजयदेवकवेरिदमुदितमुदारम् शृणु सुखदं शुभदं भवसारम्। केशव धृतदशविधरूप जय जगदीश हरे॥

कवि जयदेव की कही यह उदार स्तुति सुनिए, जो सुख और शुभ देने वाली, संसार का सार है — हे केशव, दस रूप धारण करने वाले जगदीश हरि, आपकी जय हो।

१२

वेदानुद्धरते जगन्ति वहते भूगोलमुद्बिभ्रते दैत्यं दारयते बलिं छलयते क्षत्रक्षयं कुर्वते। पौलस्त्यं जयते हलं कलयते कारुण्यमातन्वते म्लेच्छान्मूर्च्छयते दशाकृतिकृते कृष्णाय तुभ्यं नमः॥

वेदों का उद्धार करने वाले (मत्स्य), जगत को पीठ पर उठाने वाले (कच्छप), पृथ्वी को उठाने वाले (वराह), दैत्य को चीरने वाले (नरसिंह), बलि को छलने वाले (वामन), क्षत्रियों का संहार करने वाले (परशुराम), रावण को जीतने वाले (राम), हल धारण करने वाले (बलराम), करुणा फैलाने वाले (बुद्ध) और दुष्टों को मूर्च्छित करने वाले (कल्कि) — दस रूप धरने वाले हे कृष्ण, आपको नमस्कार।

दशावतार स्तोत्र (प्रलय पयोधि जले) का पाठ पूरा हुआ।

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पाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।

Dashavtar Stotra (Pralay Payodhi Jale) — Lyrics in English

अंग्रेज़ी अक्षरों (Roman Hindi) में पढ़ें

Pralayapayodhijle dhritavansi vedam
Vihitavahitracharitramakhedam ।
Keshav dhritaminashrir jai jagdish hare ॥

Kshitirih vipultare tishthati tav prishthe
Dharanidharanakinachakragarishthe ।
Keshav dhritakachchhprup jai jagdish hare ॥

Vasti dashanashikhre dharni tav lagna
Shashini kalankaklev nimagna ।
Keshav dhritasukarrup jai jagdish hare ॥

Tav karakamalvare nakhamadbhutashringam
Dalitahiranyakashiputanubhringam ।
Keshav dhritanaraharirup jai jagdish hare ॥

Chhalyasi vikramne balimadbhutavaman
Padanakhanirajanitajanapavan ।
Keshav dhritavamanrup jai jagdish hare ॥

Kshatriyarudhirmaye jagadapagatapapam
Snapyasi paysi shamitabhavatapam ।
Keshav dhritabhrigupatirup jai jagdish hare ॥

Vitrasi dikshu rane dikpatikamaniyam
Dashamukhamauliblin ramaniyam ।
Keshav dhritaramashrir jai jagdish hare ॥

Vahsi vapushi vishde vasanan jaladabham
Halahatibhitimilitayamunabham ।
Keshav dhritahaladharrup jai jagdish hare ॥

Nindasi yagyavidherhah shrutijatam
Sadayahridayadarshitapashughatam ।
Keshav dhritabuddhshrir jai jagdish hare ॥

Mlechchhnivahanidhne kalyasi karavalam
Dhumaketumiv kimpi karalam ।
Keshav dhritakalkishrir jai jagdish hare ॥

Shrijayadevakaveridamuditamudaram
Shrinu sukhadan shubhadan bhavasaram ।
Keshav dhritadashavidhrup jai jagdish hare ॥

Vedanuddhrte jaganti vahte bhugolamudbibhrate
Daityan daryate balin chhalyate kshatrakshayan kurvate ।
Paulastyan jayte halan kalyate karunyamatanvate
Mlechchhanmurchchhayte dashakritikrite krishnay tubhyan namah ॥

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दशावतार स्तोत्र किसने लिखा?

12वीं सदी के कवि जयदेव ने, अपने काव्य गीत गोविंद में।

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