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दिवाली की कथा

दिवाली की पूजा में साहूकार की बेटी और माँ लक्ष्मी की कथा सुनी जाती है, जिसमें साफ़-सुथरे, रोशन घर और सच्ची भक्ति से लक्ष्मी जी घर में बस जाती हैं। दिवाली श्रीराम के 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी में भी मनाई जाती है।

दिवाली (लक्ष्मी पूजा) 2026: 8 नवंबर 2026, रविवार — तिथि और पूजा का समय देखें

दिवाली की कथा

साहूकार की बेटी की कथा

एक गाँव में एक साहूकार रहता था। उसकी बेटी रोज़ सुबह पीपल के पेड़ में जल चढ़ाने जाती थी। उस पेड़ पर माँ लक्ष्मी का वास था। लड़की की भक्ति देखकर एक दिन लक्ष्मी जी ने उससे कहा, ‘क्या तुम मेरी सहेली बनोगी?’ लड़की ने कहा, ‘मैं पिताजी से पूछकर बताऊँगी।’

पिता की अनुमति से दोनों सहेलियाँ बन गईं। एक दिन लक्ष्मी जी उसे अपने घर ले गईं और खूब आदर-सत्कार किया। लौटते समय लक्ष्मी जी ने कहा, ‘अब तुम मुझे अपने घर कब बुलाओगी?’

लड़की ने घर आकर पिता को बताया, पर साहूकार चिंतित हो गया कि इतनी बड़ी देवी का स्वागत वह कैसे करेगा। बेटी ने कहा, ‘पिताजी, चिंता मत कीजिए। हम घर को साफ़ करेंगे, दीपक जलाएँगे और सच्चे मन से स्वागत करेंगे।’

उन्होंने पूरे घर की सफ़ाई की, आँगन में चौक पूरा और हर कोने में दीपक जलाए। सच्चे भाव से किए गए स्वागत से प्रसन्न होकर लक्ष्मी जी गणेश जी के साथ उनके घर आईं और हमेशा के लिए वहीं बस गईं। साहूकार का घर धन-धान्य से भर गया।

कथा के अंत में प्रार्थना की जाती है — ‘हे लक्ष्मी माँ, जैसे साहूकार के घर पधारीं, वैसे ही हमारे घर भी पधारना।’

दिवाली क्यों मनाते हैं

रावण पर विजय के बाद श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण कार्तिक अमावस्या को 14 साल का वनवास पूरा करके अयोध्या लौटे थे। अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को दीपों से सजा दिया। तभी से अमावस्या की अँधेरी रात को दीप जलाकर दिवाली मनाई जाती है।

यह कथा पारंपरिक कथा का OmKiran Bhakti द्वारा सरल हिंदी में किया गया पुनर्कथन है; अलग-अलग क्षेत्रों में कथा के विवरण में थोड़ा अंतर मिलता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दिवाली पर लक्ष्मी पूजा के साथ गणेश जी की पूजा क्यों होती है?

गणेश जी बुद्धि और शुभ शुरुआत के देवता हैं। मान्यता है कि लक्ष्मी (धन) के साथ गणेश (बुद्धि) हों तभी धन सुख देता है।

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