OmKiran BhaktiOmKiran Bhaktiभजन, आरती, चालीसा और मंत्र

दिवाली लक्ष्मी पूजा विधि

दिवाली की शाम प्रदोष काल में चौकी पर लक्ष्मी-गणेश की स्थापना करें, कलश रखें, संकल्प लें, पहले गणेश जी और फिर माँ लक्ष्मी की पूजा करें, कुबेर और बही-खाते की पूजा करें, आरती करें और घर भर में दीप जलाएँ। पूरी पूजा लगभग 45 मिनट में हो जाती है।

दिवाली लक्ष्मी पूजा विधि

पूजा से पहले की तैयारी

  1. दिन में घर की सफ़ाई करें, मुख्य द्वार पर तोरण और रंगोली बनाएँ। पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट पहले से मिला लें।
  2. अपने शहर का लक्ष्मी पूजा मुहूर्त देख लें। प्रदोष काल और स्थिर लग्न (वृषभ) का समय सबसे शुभ माना जाता है।
  3. पूजा से पहले स्नान करके साफ़ या नए कपड़े पहनें। पूजा की जगह घर के उत्तर-पूर्व (ईशान) कोने में हो तो उत्तम।

चौकी और कलश की स्थापना

  1. लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ, उस पर थोड़े चावल रखें और लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति या चित्र रखें। प्रचलित परंपरा में सामने से देखने पर गणेश जी बाईं ओर और लक्ष्मी जी दाईं ओर (गणेश जी के दाहिने हाथ की ओर) विराजती हैं।
  2. चौकी के पास जल से भरा कलश रखें। उसमें सिक्का, सुपारी, हल्दी और अक्षत डालें, मुँह पर आम के पत्ते रखकर ऊपर नारियल रखें।
  3. चौकी पर एक घी का बड़ा दीपक रखें जो पूरी रात जले (अखंड दीपक), और एक छोटा दीपक पूजा के लिए।

संकल्प और गणेश पूजा

  1. हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर मन में अपना नाम, गोत्र और पूजा का उद्देश्य बोलें — ‘मैं आज कार्तिक अमावस्या को परिवार की सुख-समृद्धि के लिए लक्ष्मी-गणेश की पूजा करता/करती हूँ।’ फिर जल ज़मीन पर छोड़ दें।
  2. सबसे पहले गणेश जी को जल, रोली, अक्षत, दूर्वा, फूल और लड्डू अर्पित करें। मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः॥

माँ लक्ष्मी की पूजा

  1. माँ लक्ष्मी को जल से आचमन कराएँ, फिर रोली, कुमकुम, अक्षत, कमल या गुलाब के फूल, कमलगट्टे, सिंदूर और श्रृंगार की सामग्री चढ़ाएँ।
  2. भोग में खील-बताशे, मिठाई, फल और सूखे मेवे रखें। धनिये के बीज और कौड़ियाँ भी चढ़ाई जाती हैं।
  3. हाथ जोड़कर लक्ष्मी मंत्र का 11 या 108 बार जाप करें: ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः॥ गिनती के लिए जाप माला।
  4. समय हो तो लक्ष्मी चालीसा या श्री सूक्त का पाठ करें और दिवाली की कथा सुनें।

कुबेर, बही-खाता और तिजोरी की पूजा

  1. व्यापारी परिवार नए बही-खाते या लैपटॉप पर रोली से स्वस्तिक और ‘शुभ-लाभ’ लिखकर पूजा करते हैं।
  2. तिजोरी या पैसों की जगह पर कुबेर जी का ध्यान करें, हल्दी-अक्षत चढ़ाएँ और कुबेर मंत्र बोलें।

आरती और दीपदान

  1. पहले गणेश जी की आरती, फिर लक्ष्मी जी की आरती और अंत में ॐ जय जगदीश हरे गाएँ। चाहें तो कुबेर जी की आरती भी करें।
  2. आरती के बाद पूजा के दीपक से बाकी दीपक जलाकर घर के हर कमरे, रसोई, तुलसी, मुख्य द्वार और छत पर रखें।
  3. अंत में हाथ जोड़कर पूजा में हुई भूल के लिए क्षमा माँगें और प्रसाद बाँटें। अखंड दीपक रात भर जलने दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दिवाली पर लक्ष्मी पूजा किस समय करें?

प्रदोष काल में, जब स्थिर (वृषभ) लग्न हो। अपने शहर का समय लक्ष्मी पूजा मुहूर्त पेज पर देखें।

लक्ष्मी जी और गणेश जी की मूर्ति कैसे रखें?

प्रचलित परंपरा में सामने से देखने पर गणेश जी बाईं ओर और लक्ष्मी जी दाईं ओर रखी जाती हैं। कुछ परिवारों की परंपरा अलग होती है; अपने घर की रीति मानें।

लक्ष्मी पूजा में कौन सी आरती पहले होती है?

पहले गणेश जी की, फिर लक्ष्मी जी की, और अंत में ॐ जय जगदीश हरे।

दिवाली पूजा के बाद मूर्ति का क्या करें?

कई परिवार नई मूर्ति पूरे साल पूजा घर में रखते हैं; पिछले साल की मिट्टी की मूर्ति को आदर से जल में विसर्जित या पेड़ के नीचे रख देते हैं।

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