एकादशी व्रत के नियम
एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाया जाता, दशमी की रात से सात्विक भोजन किया जाता है और अगले दिन द्वादशी में पारण किया जाता है। दिन में भगवान विष्णु की पूजा, जप और कथा का विशेष महत्व है।

✅ क्या करें
- दशमी की शाम से सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य रखें।
- सुबह स्नान करके विष्णु जी के सामने व्रत का संकल्प लें।
- तुलसी दल चढ़ाएँ (तुलसी के पत्ते एक दिन पहले तोड़कर रखें)।
- ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जप और एकादशी कथा पढ़ें।
- अगले दिन द्वादशी में, हरि वासर के बाद पारण करें और दान दें।
❌ क्या न करें
- चावल, गेहूँ, दालें और अनाज न खाएँ।
- प्याज़, लहसुन, मांस-मदिरा का सेवन न करें।
- एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें।
- किसी की निंदा, झूठ और क्रोध से बचें।
- दिन में सोने से बचें।
ये नियम परंपरा और मान्यताओं पर आधारित हैं; अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इनमें अंतर हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते?
परंपरा में एकादशी पर अन्न, ख़ासकर चावल, का त्याग किया जाता है ताकि मन हल्का रहे और ध्यान भगवान में लगे।
क्या एकादशी पर पानी पी सकते हैं?
हाँ, निर्जला एकादशी को छोड़कर बाकी एकादशी पर पानी, फल और दूध लिया जा सकता है।
