गायत्री चालीसा — पूरे बोल और अर्थ
‘ह्रीं श्रीं क्लीं मेधा प्रभा, जीवन ज्योति प्रचण्ड’ से शुरू होने वाली गायत्री चालीसा में वेदमाता गायत्री के स्वरूप, गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों की महिमा और पाठ के फल का वर्णन है।
साथ में पढ़ें: गायत्री मंत्र अर्थ सहित और सभी देवताओं के गायत्री मंत्र।

दोहा
ह्रीं श्रीं क्लीं मेधा प्रभा, जीवन ज्योति प्रचण्ड। शान्ति क्रान्ति जागृति प्रगति, रचना शक्ति अखण्ड॥
ह्रीं, श्रीं, क्लीं बीज-शक्ति, मेधा, प्रभा और जीवन की प्रचंड ज्योति — शांति, क्रांति, जागृति, प्रगति और सृजन की अखंड शक्ति आप ही हैं।
जगत जननि मंगल करनि, गायत्री सुखधाम। प्रणवों सावित्री स्वधा, स्वाहा पूरन काम॥
हे जगत की माता, मंगल करने वाली, सुख का धाम गायत्री! सावित्री, स्वधा और स्वाहा रूप आपको प्रणाम — आप सब कामनाएँ पूरी करती हैं।
चौपाई
भूर्भुवः स्वः ॐ युत जननी। गायत्री नित कलिमल दहनी॥
ॐ भूर्भुवः स्वः से युक्त हे माता गायत्री, आप कलियुग के मैल (पाप) को रोज़ जला देती हैं।
अक्षर चौबिस परम पुनीता। इनमें बसें शास्त्र श्रुति गीता॥
गायत्री मंत्र के चौबीस अक्षर परम पवित्र हैं; इनमें सारे शास्त्र, वेद और गीता का सार बसा है।
शाश्वत सतोगुणी सतरूपा। सत्य सनातन सुधा अनूपा॥
आप शाश्वत हैं, सतोगुण से भरी, सत्य का रूप; सनातन सत्य और अनुपम अमृत हैं।
हंसारूढ़ सितम्बर धारी। स्वर्णकांति शुचि गगन बिहारी॥
आप हंस पर सवार, श्वेत वस्त्र धारण करती हैं; सोने जैसी कांति वाली, पवित्र, आकाश में विचरने वाली हैं।
पुस्तक पुष्प कमंडलु माला। शुभ्र वर्ण तनु नयन विशाला॥
आपके हाथों में पुस्तक, फूल, कमंडल और माला है; उजला रंग और बड़े-बड़े नेत्र हैं।
ध्यान धरत पुलकित हिय होई। सुख उपजत दुःख दुरमति खोई॥
आपका ध्यान करते ही हृदय पुलकित हो जाता है; सुख उपजता है और दुःख व दुर्बुद्धि खो जाते हैं।
कामधेनु तुम सुर तरु छाया। निराकार की अद्भुत माया॥
आप कामधेनु और कल्पवृक्ष की छाया जैसी हैं — निराकार परमात्मा की अद्भुत शक्ति।
तुम्हरी शरण गहै जो कोई। तरै सकल संकट सों सोई॥
जो भी आपकी शरण पकड़ लेता है, वह सारे संकटों से पार हो जाता है।
सरस्वती लक्ष्मी तुम काली। दिपै तुम्हारी ज्योति निराली॥
आप ही सरस्वती, लक्ष्मी और काली हैं; आपकी निराली ज्योति हर ओर चमकती है।
तुम्हरी महिमा पार न पावैं। जो शारद शत मुख गुण गावैं॥
सरस्वती सौ मुखों से भी गुण गाएँ, तो भी आपकी महिमा का पार नहीं पा सकतीं।
चार वेद की मातु पुनीता। तुम ब्रह्माणी गौरी सीता॥
आप चारों वेदों की पवित्र माता हैं; आप ही ब्रह्माणी, गौरी और सीता हैं।
महामंत्र जितने जग माहीं। कोऊ गायत्री सम नाहीं॥
संसार में जितने भी महामंत्र हैं, उनमें कोई गायत्री के बराबर नहीं।
सुमिरत हिय में ज्ञान प्रकासै। आलस पाप अविद्या नासै॥
आपका स्मरण करते ही हृदय में ज्ञान का प्रकाश होता है; आलस, पाप और अज्ञान नष्ट हो जाते हैं।
सृष्टि बीज जग जननि भवानी। कालरात्रि वरदा कल्यानी॥
आप सृष्टि का बीज, जगत-जननी भवानी, कालरात्रि, वर देने वाली और कल्याणी हैं।
ब्रह्मा विष्णु रुद्र सुर जेते। तुम सों पावें सुरता तेते॥
ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र और जितने भी देवता हैं, सबने अपना देवत्व आपसे ही पाया है।
तुम भक्तन की भक्त तुम्हारे। जननिहिं पुत्र प्राण ते प्यारे॥
आप भक्तों की हैं और भक्त आपके; जैसे माँ को बेटा प्राणों से प्यारा होता है।
महिमा अपरम्पार तुम्हारी। जय जय जय त्रिपदा भयहारी॥
आपकी महिमा अपार है; हे तीन चरणों वाली (त्रिपदा) गायत्री, भय हरने वाली, आपकी जय हो।
पूरित सकल ज्ञान विज्ञाना। तुम सम अधिक न जग में आना॥
आप सारे ज्ञान-विज्ञान से भरी हैं; संसार में आपसे बढ़कर कोई दूसरा नहीं।
तुमहिं जानि कछु रहै न शेषा। तुमहिं पाय कछु रहै न क्लेशा॥
आपको जान लेने पर जानने को कुछ शेष नहीं रहता; आपको पा लेने पर कोई कष्ट नहीं बचता।
जानत तुमहिं तुमहिं ह्वै जाई। पारस परसि कुधातु सुहाई॥
जो आपको जान लेता है वह आप जैसा हो जाता है — जैसे पारस छूकर लोहा भी सोना बन जाता है।
तुम्हरी शक्ति दिपै सब ठाई। माता तुम सब ठौर समाई॥
आपकी शक्ति हर जगह चमकती है; हे माता, आप हर स्थान में समाई हैं।
ग्रह नक्षत्र ब्रह्माण्ड घनेरे। सब गतिवान तुम्हारे प्रेरे॥
असंख्य ग्रह, नक्षत्र और ब्रह्मांड आपकी प्रेरणा से ही गति करते हैं।
सकल सृष्टि की प्राण विधाता। पालक पोषक नाशक त्राता॥
आप सारी सृष्टि की प्राण-दाता हैं — पालन, पोषण, संहार और रक्षा करने वाली।
मातेश्वरी दया व्रत धारी। तुम सन तरे पातकी भारी॥
हे माता-ईश्वरी, आपने दया का व्रत धारण किया है; आपकी कृपा से बड़े-बड़े पापी भी तर गए।
जापर कृपा तुम्हारी होई। तापर कृपा करें सब कोई॥
जिस पर आपकी कृपा होती है, उस पर सब कृपा करते हैं।
मंद बुद्धि ते बुधि बल पावें। रोगी रोग रहित ह्वै जावें॥
मंद बुद्धि वाले बुद्धि और बल पाते हैं; रोगी रोग से मुक्त हो जाते हैं।
दारिद मिटै कटै सब पीरा। नाशै दुःख हरै भव भीरा॥
गरीबी मिटती है, सारी पीड़ा कटती है; दुःख नष्ट होता है और संसार का भय दूर होता है।
गृह कलेश चित चिंता भारी। नासै गायत्री भय हारी॥
घर का कलह और मन की भारी चिंता — भय हरने वाली गायत्री सब नष्ट कर देती हैं।
संतति हीन सुसंतति पावें। सुख संपत्ति युत मोद मनावें॥
संतानहीन अच्छी संतान पाते हैं और सुख-संपत्ति के साथ आनंद मनाते हैं।
भूत पिशाच सबै भय खावें। यम के दूत निकट नहिं आवें॥
भूत-पिशाच सब डरते हैं; यमराज के दूत भी पास नहीं आते।
जो सधवा सुमिरें चित लाई। अछत सुहाग सदा सुखदाई॥
जो सुहागिन मन लगाकर स्मरण करती है, उसका सुहाग अखंड रहता है और सदा सुख मिलता है।
घर वर सुखप्रद लहैं कुमारी। विधवा रहें सत्य व्रत धारी॥
कुंवारी कन्याएँ सुख देने वाला घर-वर पाती हैं; विधवाएँ सत्य-व्रत में दृढ़ रहती हैं।
जयति जयति जगदम्ब भवानी। तुम सम और दयालु न दानी॥
हे जगदंबा भवानी, आपकी जय हो; आपके समान दयालु और दानी कोई नहीं।
जो सद्गुरु सों दीक्षा पावें। सो साधन को सफल बनावें॥
जो सद्गुरु से दीक्षा लेते हैं, वे अपनी साधना को सफल बना लेते हैं।
सुमिरन करें सुरुचि बड़भागी। लहैं मनोरथ गृही विरागी॥
जो भाग्यशाली रुचि से स्मरण करते हैं — गृहस्थ हों या वैरागी — सबके मनोरथ पूरे होते हैं।
अष्ट सिद्धि नवनिधि की दाता। सब समर्थ गायत्री माता॥
गायत्री माता आठों सिद्धियाँ और नौ निधियाँ देने वाली, सब कुछ करने में समर्थ हैं।
ऋषि मुनि यती तपस्वी जोगी। आरत अर्थी चिंतित भोगी॥
ऋषि, मुनि, संन्यासी, तपस्वी, योगी, दुखी, धन चाहने वाले, चिंतित और भोगी —
जो जो शरण तुम्हारी आवें। सो सो मन वांछित फल पावें॥
— जो-जो आपकी शरण आते हैं, वे मनचाहा फल पाते हैं।
बल बुद्धि विद्या शील स्वभाऊ। धन वैभव यश तेज उछाऊ॥
बल, बुद्धि, विद्या, अच्छा स्वभाव, धन, वैभव, यश, तेज और उत्साह —
सकल बढ़ें उपजे सुख नाना। जो यह पाठ करै धरि ध्याना॥
— ये सब बढ़ते हैं और तरह-तरह के सुख उपजते हैं, जो ध्यान लगाकर यह पाठ करता है।
दोहा
यह चालीसा भक्तियुत, पाठ करे जो कोय। तापर कृपा प्रसन्नता, गायत्री की होय॥
जो भक्ति से यह चालीसा पढ़ता है, उस पर गायत्री माता प्रसन्न होकर कृपा करती हैं।
गायत्री चालीसा का पाठ पूरा हुआ।
किसी अपने को WhatsApp पर भेजेंपाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।


