गायत्री मंत्र — अर्थ सहित
गायत्री मंत्र ऋग्वेद (3.62.10) का मंत्र है, जिसके ऋषि विश्वामित्र हैं। इसमें सूर्य-स्वरूप परमात्मा (सविता) से बुद्धि को सही राह पर ले जाने की प्रार्थना है।
सुबह सूर्योदय के समय, ब्रह्म मुहूर्त में या संध्या के समय इसका जाप सबसे उत्तम माना जाता है।
ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥
हम उस प्राण-स्वरूप, दुख-नाशक, सुख-स्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, दिव्य परमात्मा (सविता) का ध्यान करते हैं; वह हमारी बुद्धि को सही मार्ग पर प्रेरित करें।
गायत्री मंत्र का पाठ पूरा हुआ।
किसी अपने को WhatsApp पर भेजेंपाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।


