हनुमान मंत्र — गायत्री, मनोजवं और बीज मंत्र अर्थ सहित
हनुमान जी के सबसे ज़्यादा जपे जाने वाले मंत्र हैं: आञ्जनेय गायत्री (ॐ आञ्जनेयाय विद्महे), मनोजवं श्लोक और मूल मंत्र ‘ॐ हं हनुमते नमः’। मंगलवार-शनिवार को 108 बार जप किया जाता है।
जप के लिए ऑनलाइन जाप माला से गिनती रखें।

आञ्जनेय (हनुमान) गायत्री मंत्र
ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥
हम अंजनी-पुत्र को जानें, वायु-पुत्र का ध्यान करें; वे हनुमान हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।
मनोजवं — हनुमान वंदना
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
मन जैसी गति और वायु जैसे वेग वाले, इंद्रियों को जीतने वाले, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, वायु-पुत्र, वानर सेना के प्रमुख, श्रीराम के दूत की मैं शरण लेता हूँ।
हनुमान मूल मंत्र
ॐ हं हनुमते नमः॥
‘हं’ हनुमान जी का बीज अक्षर है — हनुमान जी को नमस्कार। मंगलवार और शनिवार को 108 बार जप किया जाता है।
श्री हनुमते नमः
ॐ श्री हनुमते नमः॥
श्री हनुमान जी को नमस्कार — सबसे सरल नाम-मंत्र, जिसे कोई भी कभी भी जप सकता है।
राम दूत मंत्र
ॐ नमो भगवते आञ्जनेयाय महाबलाय स्वाहा॥
भगवान आञ्जनेय, महाबली हनुमान को नमस्कार।
बुद्धि-बल की प्रार्थना (हनुमान चालीसा से)
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥
स्वयं को बुद्धिहीन जानकर मैं पवनपुत्र का स्मरण करता हूँ — मुझे बल, बुद्धि और विद्या दीजिए और मेरे दुख-दोष दूर कीजिए।
हनुमान मंत्र का पाठ पूरा हुआ।
किसी अपने को WhatsApp पर भेजेंपाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।
