हरि तुम हरो जन की भीर — मीराबाई — पूरे बोल और हिंदी अर्थ
‘हरि तुम हरो जन की भीर’ मीराबाई का भजन है, जिसमें वे भगवान से प्रार्थना करती हैं कि जैसे आपने द्रौपदी की लाज, प्रह्लाद और गजराज की रक्षा की, वैसे ही मेरा दुख भी दूर करो। यह महात्मा गांधी का प्रिय भजन था।
मीराबाई की रचना। यहाँ NCERT (कक्षा 10, स्पर्श) वाला राजस्थानी पाठ है; गाने में ‘हरि तुम हरो जन की भीर’ कहा जाता है। सभी संत भजन।
पाठभेद: अलग-अलग पुस्तकों और गायकों में कुछ शब्द अलग मिलते हैं; यहाँ प्रचलित/मानक पाठ दिया है।

हरि आप हरो जन री भीर।
हे हरि, आप अपने भक्तों का दुख (संकट) दूर कीजिए।
द्रोपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर॥
आपने द्रौपदी की लाज रखी और उसकी साड़ी बढ़ाते चले गए।
भगत कारण रूप नरहरि, धर्यो आप सरीर।
भक्त प्रह्लाद के लिए आपने नरसिंह का शरीर धारण किया।
बूढ़तो गजराज राख्यो, काटी कुण्जर पीर॥
डूबते हुए गजराज को बचाया और हाथी की पीड़ा काट दी।
दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर॥
दासी मीरा कहती हैं — हे गिरधर लाल, मेरा भी दुख दूर करो।
हरि तुम हरो जन की भीर — मीराबाई का पाठ पूरा हुआ।
किसी अपने को WhatsApp पर भेजेंपाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।
