माई री मैं तो लियो गोविंदो मोल — मीराबाई — पूरे बोल और भावार्थ
‘माई री मैं तो लियो गोविंदो मोल’ मीराबाई की रचना है। मीरा कहती हैं — सखी, मैंने तो गोविंद को मोल ले लिया है। कोई कहता है छिपकर लिया, पर मैंने ढोल बजाकर, तराजू में तौलकर, आँखें खोलकर लिया है। कोई महँगा कहे या सस्ता, काला कहे या गोरा — मेरे लिए वे अनमोल हैं।
मीराबाई की रचना। सभी संत भजन।
पाठभेद: यह पाठ प्रचलित संस्करणों से लिया गया है; अलग-अलग पुस्तकों और गायकों में कुछ शब्द अलग मिलते हैं। हम इसे मुद्रित संस्करण से मिलान कर रहे हैं।

माई री मैं तो लियो गोविंदो मोल। कोई कहै छानै, कोई कहै छुपकै, लियो री बजंता ढोल॥ कोई कहै मुँहघो, कोई कहै सुहँगो, लियो री तराजू तोल। कोई कहै कारो, कोई कहै गोरो, लियो री अमोलक मोल॥ याही कूँ सब जाणत है, लियो री आँखी खोल। मीरा कूँ प्रभु दरसण दीज्यो, पूरब जनम को कोल॥
भावार्थ: मीरा कहती हैं — सखी, मैंने तो गोविंद को मोल ले लिया है। कोई कहता है छिपकर लिया, पर मैंने ढोल बजाकर, तराजू में तौलकर, आँखें खोलकर लिया है। कोई महँगा कहे या सस्ता, काला कहे या गोरा — मेरे लिए वे अनमोल हैं।
माई री मैं तो लियो गोविंदो मोल — मीराबाई का पाठ पूरा हुआ।
किसी अपने को WhatsApp पर भेजेंपाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।
