श्री गोवर्धन महाराज — गोवर्धन आरती — बोल और हिंदी अर्थ
‘श्री गोवर्धन महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो’ गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) के दिन गाई जाने वाली गिरिराज जी की ब्रज भाषा की पारंपरिक आरती है। इसमें गोवर्धन की सात कोस की परिक्रमा और श्रृंगार का वर्णन है।
दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा पर — गोवर्धन पूजा की कथा और गोवर्धन पूजा कब है।

श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो॥
हे श्री गोवर्धन महाराज (गिरिराज जी), आपके माथे पर मुकुट सुशोभित है।
तोपे पान चढ़े, तोपे फूल चढ़े, तोपे चढ़े दूध की धार॥
आप पर पान चढ़ते हैं, फूल चढ़ते हैं और दूध की धारा चढ़ाई जाती है।
तेरी सात कोस की परिकम्मा, और चकलेश्वर विश्राम॥
आपकी सात कोस (लगभग 21 किलोमीटर) की परिक्रमा होती है, और चकलेश्वर महादेव पर भक्त विश्राम करते हैं।
तेरे गले में कण्ठा साज रह्यो, ठोड़ी पे हीरा लाल॥
आपके गले में कंठहार सजा है और ठोड़ी पर हीरा-लाल चमक रहा है।
तेरे कानन कुण्डल चमक रह्यो, तेरी झाँकी बनी विशाल॥
आपके कानों में कुंडल चमक रहे हैं और आपकी झाँकी बहुत भव्य सजी है।
गिरिराज धरण प्रभु तेरी शरण, करो भक्त का बेड़ा पार॥
हे गिरिराज को धारण करने वाले प्रभु श्रीकृष्ण, हम आपकी शरण में हैं — अपने भक्तों का बेड़ा पार लगाइए।
श्री गोवर्धन महाराज — गोवर्धन आरती का पाठ पूरा हुआ।
किसी अपने को WhatsApp पर भेजेंपाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।

