OmKiran BhaktiOmKiran Bhaktiभजन, आरती, चालीसा और मंत्र

मानुस हौं तो वही रसखानि — रसखान — पूरे बोल और भावार्थ

‘मानुस हौं तो वही रसखानि’ रसखान की रचना है। रसखान की कामना — अगर अगले जन्म में मनुष्य बनूँ तो ब्रज के गोकुल गाँव में ग्वाला बनूँ, पशु बनूँ तो नंद की गायों में चरूँ, पत्थर बनूँ तो उसी गोवर्धन पर्वत का बनूँ जिसे श्रीकृष्ण ने छाते की तरह उठाया था, और पक्षी बनूँ तो यमुना किनारे कदंब की डालों पर बसेरा करूँ।

रसखान की रचना। सभी संत भजन।

पाठभेद: यह पाठ प्रचलित संस्करणों से लिया गया है; अलग-अलग पुस्तकों और गायकों में कुछ शब्द अलग मिलते हैं। हम इसे मुद्रित संस्करण से मिलान कर रहे हैं।

मानुस हौं तो वही रसखानि — रसखान — पूरे बोल और भावार्थ

मानुस हौं तो वही रसखानि, बसौं ब्रज गोकुल गाँव के ग्वारन। जौ पसु हौं तो कहा बस मेरो, चरौं नित नंद की धेनु मँझारन॥ पाहन हौं तो वही गिरि को, जो धर्यो कर छत्र पुरंदर धारन। जौ खग हौं तो बसेरो करौं, मिलि कालिंदी कूल कदंब की डारन॥

भावार्थ: रसखान की कामना — अगर अगले जन्म में मनुष्य बनूँ तो ब्रज के गोकुल गाँव में ग्वाला बनूँ, पशु बनूँ तो नंद की गायों में चरूँ, पत्थर बनूँ तो उसी गोवर्धन पर्वत का बनूँ जिसे श्रीकृष्ण ने छाते की तरह उठाया था, और पक्षी बनूँ तो यमुना किनारे कदंब की डालों पर बसेरा करूँ।

मानुस हौं तो वही रसखानि — रसखान का पाठ पूरा हुआ।

किसी अपने को WhatsApp पर भेजें

पाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।

Manus Haun To Vahi Raskhani — Lyrics in English

अंग्रेज़ी अक्षरों (Roman Hindi) में पढ़ें

Manus haun to vahi raskhani, basaun braj gokul ganv ke gvaran ।
Jau pasu haun to kaha bas mero, charaun nit nand ki dhenu manjharan ॥
Pahan haun to vahi giri ko, jo dharyo kar chhatra purandar dharan ।
Jau khag haun to basero karaun, mili kalindi kul kadanb ki daran ॥

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

‘मानुस हौं तो वही रसखानि’ किसने लिखा?

रसखान ने।

‘मानुस हौं तो वही रसखानि’ का अर्थ क्या है?

रसखान की कामना — अगर अगले जन्म में मनुष्य बनूँ तो ब्रज के गोकुल गाँव में ग्वाला बनूँ, पशु बनूँ तो नंद की गायों में चरूँ, पत्थर बनूँ तो उसी गोवर्धन पर्वत का बनूँ जिसे श्रीकृष्ण ने छाते की तरह उठाया था, और पक्षी बनूँ तो यमुना किनारे कदंब की डालों पर बसेरा करूँ।

चैनल से जुड़ें