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निसिदिन बरसत नैन हमारे — सूरदास — पूरे बोल और भावार्थ

‘निसिदिन बरसत नैन हमारे’ सूरदास की रचना है। श्रीकृष्ण के मथुरा जाने के बाद गोपियों का विरह — हमारी आँखें दिन-रात बरसती रहती हैं, जब से श्याम गए हैं, हम पर हमेशा बरसात का मौसम रहता है। सूरदास कहते हैं कि ब्रज आँसुओं में डूब रहा है, प्रभु आकर उबारते क्यों नहीं?

सूरदास की रचना। सभी संत भजन।

पाठभेद: यह पाठ प्रचलित संस्करणों से लिया गया है; अलग-अलग पुस्तकों और गायकों में कुछ शब्द अलग मिलते हैं। हम इसे मुद्रित संस्करण से मिलान कर रहे हैं।

निसिदिन बरसत नैन हमारे — सूरदास — पूरे बोल और भावार्थ

निसिदिन बरसत नैन हमारे। सदा रहत पावस ऋतु हम पर, जब तें स्याम सिधारे॥ अंजन थिर न रहत अँखियन में, कर कपोल भए कारे। कंचुकि-पट सूखत नहिं कबहूँ, उर बिच बहत पनारे॥ आँसू सलिल भए पग थाके, बहे जात सित तारे। सूरदास अब डूबत है ब्रज, काहे न लेत उबारे॥

भावार्थ: श्रीकृष्ण के मथुरा जाने के बाद गोपियों का विरह — हमारी आँखें दिन-रात बरसती रहती हैं, जब से श्याम गए हैं, हम पर हमेशा बरसात का मौसम रहता है। सूरदास कहते हैं कि ब्रज आँसुओं में डूब रहा है, प्रभु आकर उबारते क्यों नहीं?

निसिदिन बरसत नैन हमारे — सूरदास का पाठ पूरा हुआ।

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पाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।

Nisidin Barsat Nain Hamare — Lyrics in English

अंग्रेज़ी अक्षरों (Roman Hindi) में पढ़ें

Nisidin barsat nain hamare ।
Sada rahat pavas ritu ham par, jab ten syam sidhare ॥
Anjan thir na rahat ankhiyan men, kar kapol bhae kare ।
Kanchuki-pat sukhat nahin kabhun, ur bich bahat panare ॥
Ansu salil bhae pag thake, bahe jat sit tare ।
Surdas ab dubat hai braj, kahe na let ubare ॥

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

‘निसिदिन बरसत नैन हमारे’ किसने लिखा?

सूरदास ने।

‘निसिदिन बरसत नैन हमारे’ का अर्थ क्या है?

श्रीकृष्ण के मथुरा जाने के बाद गोपियों का विरह — हमारी आँखें दिन-रात बरसती रहती हैं, जब से श्याम गए हैं, हम पर हमेशा बरसात का मौसम रहता है। सूरदास कहते हैं कि ब्रज आँसुओं में डूब रहा है, प्रभु आकर उबारते क्यों नहीं?

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