OmKiran BhaktiOmKiran Bhaktiभजन, आरती, चालीसा और मंत्र

ऋणमोचन मंगल स्तोत्र — पूरा पाठ और हिंदी अर्थ

ऋणमोचन मंगल स्तोत्र में मंगल ग्रह (भौम, कुज, अंगारक) के 21 नाम और उनसे कर्ज़, रोग और दरिद्रता दूर करने की प्रार्थना है। मंगलवार को इसका पाठ विशेष माना जाता है।

मंगलवार को, लाल फूल और गुड़ चढ़ाकर — साथ में हनुमान चालीसा और नवग्रह मंत्र।

ऋणमोचन मंगल स्तोत्र — पूरा पाठ और हिंदी अर्थ
१

मङ्गलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रदः। स्थिरासनो महाकायः सर्वकर्मविरोधकः॥

मंगल, भूमि-पुत्र, कर्ज़ हरने वाले, धन देने वाले, स्थिर आसन वाले, विशाल शरीर वाले, (अशुभ) कर्मों को रोकने वाले —

२

लोहितो लोहिताक्षश्च सामगानां कृपाकरः। धरात्मजः कुजो भौमो भूतिदो भूमिनन्दनः॥

— लाल रंग वाले, लाल आँखों वाले, सामवेद गाने वालों पर कृपा करने वाले, धरती के पुत्र, कुज, भौम, ऐश्वर्य देने वाले, भूमिनंदन —

३

अङ्गारको यमश्चैव सर्वरोगापहारकः। वृष्टेः कर्ताऽपहर्ता च सर्वकामफलप्रदः॥

— अंगारक, यम, सारे रोग हरने वाले, वर्षा कराने और रोकने वाले, सब कामनाओं का फल देने वाले (ये मंगल के 21 नाम हैं)।

४

एतानि कुजनामानि नित्यं यः श्रद्धया पठेत्। ऋणं न जायते तस्य धनं शीघ्रमवाप्नुयात्॥

जो श्रद्धा से रोज़ मंगल के ये नाम पढ़ता है, उस पर कर्ज़ नहीं चढ़ता और उसे जल्दी धन मिलता है।

५

धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम्। कुमारं शक्तिहस्तं च मङ्गलं प्रणमाम्यहम्॥

धरती के गर्भ से उत्पन्न, बिजली जैसी चमक वाले, कुमार रूप, हाथ में शक्ति (भाला) लिए मंगल देव को मैं प्रणाम करता हूँ।

६

स्तोत्रमङ्गारकस्यैतत्पठनीयं सदा नृभिः। न तेषां भौमजा पीडा स्वल्पाऽपि भवति क्वचित्॥

मंगल का यह स्तोत्र मनुष्यों को सदा पढ़ना चाहिए; ऐसा करने वालों को मंगल से होने वाली थोड़ी सी भी पीड़ा कभी नहीं होती।

७

अङ्गारक महाभाग भगवन्भक्तवत्सल। त्वां नमामि ममाशेषमृणमाशु विनाशय॥

हे महाभाग अंगारक, हे भक्तवत्सल भगवान, मैं आपको नमस्कार करता हूँ; मेरा सारा कर्ज़ जल्दी मिटा दीजिए।

८

ऋणरोगादिदारिद्र्यं ये चान्ये ह्यपमृत्यवः। भयक्लेशमनस्तापा नश्यन्तु मम सर्वदा॥

कर्ज़, रोग, गरीबी, अकाल मृत्यु, भय, क्लेश और मन का संताप — मेरे ये सब सदा के लिए नष्ट हों।

९

अतिवक्त्र दुराराध्य भोगमुक्तजितात्मनः। तुष्टो ददासि साम्राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात्॥

हे वक्र गति वाले, जिन्हें प्रसन्न करना कठिन है — आप प्रसन्न हों तो साम्राज्य दे देते हैं और रुष्ट हों तो उसी क्षण छीन लेते हैं।

१०

विरिञ्चिशक्रविष्णूनां मनुष्याणां तु का कथा। तेन त्वं सर्वसत्त्वेन ग्रहराजो महाबलः॥

ब्रह्मा, इंद्र और विष्णु पर भी आपका प्रभाव है, तो मनुष्यों की क्या बात! इसी शक्ति के कारण आप महाबली ग्रहराज हैं।

११

पुत्रान्देहि धनं देहि त्वामस्मि शरणं गतः। ऋणदारिद्र्यदुःखेन शत्रूणां च भयात्ततः॥

कर्ज़, गरीबी के दुःख और शत्रुओं के भय से घबराकर मैं आपकी शरण आया हूँ; मुझे संतान और धन दीजिए।

१२

एभिर्द्वादशभिः श्लोकैर्यः स्तौति च धरासुतम्। महतीं श्रियमाप्नोति ह्यपरो धनदो युवा॥

जो इन बारह श्लोकों से धरती-पुत्र मंगल की स्तुति करता है, वह बड़ी संपत्ति पाता है और दूसरे युवा कुबेर जैसा हो जाता है।

ऋणमोचन मंगल स्तोत्र का पाठ पूरा हुआ।

किसी अपने को WhatsApp पर भेजें

पाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।

Rinamochan Mangal Stotra — Lyrics in English

अंग्रेज़ी अक्षरों (Roman Hindi) में पढ़ें

Mangalo bhumiputrashch rinaharta dhanapradah ।
Sthirasno mahakayah sarvakarmavirodhakah ॥

Lohito lohitakshashch samgana kripakarah ।
Dharatmajah kujo bhaumo bhutido bhuminandanah ॥

Angarko yamashchaiv sarvarogapaharakah ।
Vrishteh karta'paharta cha sarvakamaphalapradah ॥

Etani kujanamani nityan yah shraddhya pathet ।
Rinan na jayte tasya dhanan shighramavapnuyat ॥

Dharanigarbhasambhutan vidyutkantisamaprabham ।
Kumaran shaktihastan cha mangalan pranamamyaham ॥

Stotramangarakasyaitatpathniy sada nribhih ।
Na teshan bhaumja pida swalpa'pi bhavti kvachit ॥

Angarak mahabhag bhagavanbhaktavatsal ।
Tvan namami mamasheshamrinmashu vinashay ॥

Rinarogadidaridryan ye chanye hyapamrityavah ।
Bhayakleshamanastapa nashyantu mam sarvada ॥

Ativaktra duraradhya bhogamuktajitatmanah ।
Tushto dadasi samrajyan rushto harsi tatkshanat ॥

Virinchishakravishnunan manushyanan tu ka katha ।
Ten tvan sarvasattven grahrajo mahabalah ॥

Putrandehi dhanan dehi tvamasmi sharanan gatah ।
Rinadaridryaduhkhen shatrunan cha bhayattatah ॥

Ebhirdwadshabhih shlokairyah stauti cha dharasutam ।
Mahtin shriyamapnoti hyapro dhando yuva ॥

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ऋणमोचन मंगल स्तोत्र कब पढ़ें?

मंगलवार को सूर्योदय के बाद; मान्यता है कि लगातार 21 मंगलवार पाठ करने से कर्ज़ से जुड़ी परेशानियाँ कम होती हैं।

चैनल से जुड़ें