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सबसे ऊँची प्रेम सगाई — सूरदास — पूरे बोल और हिंदी अर्थ

‘सबसे ऊँची प्रेम सगाई’ सूरदास का पद है, जिसमें बताया गया है कि भगवान केवल प्रेम के वश में होते हैं — उन्होंने दुर्योधन के मेवे छोड़कर विदुर का साग खाया, शबरी के जूठे बेर खाए और अर्जुन का रथ हाँका।

सूरदास की रचना। सभी संत भजन।

पाठभेद: अलग-अलग पुस्तकों और गायकों में कुछ शब्द अलग मिलते हैं; यहाँ प्रचलित/मानक पाठ दिया है।

सबसे ऊँची प्रेम सगाई — सूरदास — पूरे बोल और हिंदी अर्थ

सबसे ऊँची प्रेम सगाई।

सबसे ऊँचा रिश्ता प्रेम का रिश्ता है।

दुर्योधन की मेवा त्यागी, साग बिदुर घर खाई॥

श्रीकृष्ण ने दुर्योधन के मेवे-पकवान ठुकरा दिए और प्रेम से विदुर के घर साग खाया।

जूठे फल सबरी के खाये, बहुबिधि स्वाद बताई।

श्रीराम ने शबरी के जूठे बेर खाए और बार-बार उनके स्वाद की सराहना की।

प्रेम के बस नृप सेवा कीन्हीं, आप बने हरि नाई॥

प्रेम के वश में होकर भगवान ने राजा की सेवा की और स्वयं नाई का रूप धरा (भक्त सेन नाई की कथा)।

राजसूय जग्य जुधिष्ठिर कीन्हों, तामें जूठ उठाई।

युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में भगवान ने स्वयं जूठी पत्तलें उठाईं।

प्रेम के बस पारथ रथ हाँक्यो, भूलि गए ठकुराई॥

प्रेम के वश में अर्जुन का रथ हाँका और अपनी सारी प्रभुता भूल गए।

ऐसी प्रीति बढ़ी बृंदाबन, गोपिन नाच नचाई।

वृंदावन में ऐसी प्रीति बढ़ी कि गोपियों ने भगवान को नचा दिया।

सूर क्रूर इहि लायक नाहीं, कहँ लगि करौं बड़ाई॥

सूरदास कहते हैं — मैं इस योग्य नहीं कि प्रभु की महिमा का पूरा बखान कर सकूँ।

सबसे ऊँची प्रेम सगाई — सूरदास का पाठ पूरा हुआ।

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पाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।

Sabse Unchi Prem Sagai — Lyrics in English

अंग्रेज़ी अक्षरों (Roman Hindi) में पढ़ें

Sabse unchi prem sagai ।

Duryodhan ki meva tyagi, sag bidur ghar khai ॥

Juthe phal sabri ke khaye, bahubidhi swad batai ।

Prem ke bas nrip seva kinhin, ap bane hari nai ॥

Rajsuy jagya judhishthir kinhon, tamen juth uthai ।

Prem ke bas parath rath hankyo, bhuli gae thakurai ॥

Aisi priti barhi brindaban, gopin nach nachai ।

Sur krur ihi layak nahin, kahan lagi karaun barai ॥

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

‘सबसे ऊँची प्रेम सगाई’ का संदेश क्या है?

भगवान धन-वैभव से नहीं, सच्चे प्रेम से प्रसन्न होते हैं।

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