सेस गनेस महेस दिनेस — रसखान — पूरे बोल और भावार्थ
‘सेस गनेस महेस दिनेस’ रसखान की रचना है। रसखान कहते हैं — जिन्हें शेषनाग, गणेश, महेश, सूर्य और इंद्र निरंतर गाते हैं, जिन्हें वेद अनादि, अनंत और अखंड बताते हैं, जिनका पार नारद, शुकदेव और व्यास भी नहीं पा सके — उन्हीं श्रीकृष्ण को अहीरों की छोकरियाँ छाछ भरी कटोरी के लिए नाच नचाती हैं। यह प्रेम की महिमा है।
रसखान की रचना। सभी संत भजन।
पाठभेद: यह पाठ प्रचलित संस्करणों से लिया गया है; अलग-अलग पुस्तकों और गायकों में कुछ शब्द अलग मिलते हैं। हम इसे मुद्रित संस्करण से मिलान कर रहे हैं।

सेस गनेस महेस दिनेस, सुरेसहु जाहि निरंतर गावैं। जाहि अनादि अनंत अखंड, अछेद अभेद सुबेद बतावैं॥ नारद से सुक ब्यास रटैं, पचि हारे तऊ पुनि पार न पावैं। ताहि अहीर की छोहरियाँ, छछिया भरि छाछ पै नाच नचावैं॥
भावार्थ: रसखान कहते हैं — जिन्हें शेषनाग, गणेश, महेश, सूर्य और इंद्र निरंतर गाते हैं, जिन्हें वेद अनादि, अनंत और अखंड बताते हैं, जिनका पार नारद, शुकदेव और व्यास भी नहीं पा सके — उन्हीं श्रीकृष्ण को अहीरों की छोकरियाँ छाछ भरी कटोरी के लिए नाच नचाती हैं। यह प्रेम की महिमा है।
सेस गनेस महेस दिनेस — रसखान का पाठ पूरा हुआ।
किसी अपने को WhatsApp पर भेजेंपाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।
