श्री सूक्त (लक्ष्मी सूक्त) — पूरा पाठ और हिंदी अर्थ
श्री सूक्त ऋग्वेद के परिशिष्ट (खिल) भाग का सूक्त है, जिसमें अग्निदेव से प्रार्थना है कि वे कभी न जाने वाली लक्ष्मी को घर लाएँ और दरिद्रता (अलक्ष्मी) को दूर करें। लक्ष्मी पूजा में इसके 15 मंत्रों से हवन और जप की परंपरा है।
दिवाली की रात, शुक्रवार और शरद पूर्णिमा पर — साथ में महालक्ष्मी अष्टकम् और लक्ष्मी चालीसा।

ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥
हे अग्निदेव (जातवेद), सोने जैसे रंग वाली, हरिणी जैसी सुंदर, सोने-चाँदी की माला पहने, चंद्रमा जैसी शीतल, स्वर्णमयी लक्ष्मी को मेरे पास लाइए।
तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्। यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम्॥
हे अग्निदेव, उन लक्ष्मी को मेरे पास लाइए जो कभी छोड़कर न जाएँ, जिनके आने से मैं सोना, गायें, घोड़े और परिवार-जन पाऊँ।
अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम्। श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम्॥
जिनके आगे घोड़े हैं, जो रथ के बीच बैठी हैं, हाथियों की चिंघाड़ से जिनके आगमन का पता चलता है — उन श्री देवी को मैं बुलाता हूँ; वे मुझ पर प्रसन्न हों।
कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम्। पद्मे स्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम्॥
जो आनंद रूप हैं, मंद मुस्कान वाली, सोने के घेरे में रहने वाली, करुणा से भीगी, तेज से दमकती, स्वयं तृप्त और दूसरों को तृप्त करने वाली, कमल पर बैठी, कमल के रंग वाली हैं — उन श्री को मैं यहाँ बुलाता हूँ।
चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम्। तां पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्येऽलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे॥
चंद्रमा जैसी, प्रकाशमान, यश से दमकती, देवताओं द्वारा सेवित, उदार, कमल वाली लक्ष्मी की मैं शरण लेता हूँ; मेरी दरिद्रता नष्ट हो — मैं आपको चुनता हूँ।
आदित्यवर्णे तपसोऽधिजातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः। तस्य फलानि तपसा नुदन्तु मायान्तरायाश्च बाह्या अलक्ष्मीः॥
हे सूर्य जैसी कांति वाली, आपके तप से बेल का वृक्ष उत्पन्न हुआ; उसके फल मेरे भीतर और बाहर की दरिद्रता और बाधाओं को दूर करें।
उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह। प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन्कीर्तिमृद्धिं ददातु मे॥
देवताओं के मित्र (कुबेर) और कीर्ति, मणि (धन) के साथ मेरे पास आएँ; मैं इस देश में जन्मा हूँ, मुझे कीर्ति और समृद्धि मिले।
क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम्। अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णुद मे गृहात्॥
भूख-प्यास और मैल रूपी बड़ी बहन अलक्ष्मी को मैं नष्ट करता हूँ; हे लक्ष्मी, अभाव और असमृद्धि को मेरे घर से निकाल दीजिए।
गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम्। ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम्॥
सुगंध जिनका द्वार है, जिन्हें कोई हरा नहीं सकता, जो सदा पुष्ट और अन्न-धन से भरी हैं, सब प्राणियों की स्वामिनी हैं — उन श्री को मैं यहाँ बुलाता हूँ।
मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि। पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः॥
हमारे मन की इच्छाएँ और संकल्प पूरे हों, वाणी सच्ची हो; पशु-धन, सुंदरता, अन्न और यश के रूप में लक्ष्मी मुझमें बसें।
कर्दमेन प्रजाभूता मयि सम्भव कर्दम। श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम्॥
हे कर्दम ऋषि (लक्ष्मी के पुत्र), आपसे लक्ष्मी संतानवती हुईं; आप मेरे यहाँ प्रकट होइए और कमल-माला पहनने वाली माता लक्ष्मी को मेरे कुल में बसाइए।
आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस मे गृहे। नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले॥
जल स्नेह और कोमलता उपजाए; हे चिक्लीत (लक्ष्मी-पुत्र), मेरे घर में रहिए और देवी माता लक्ष्मी को मेरे कुल में बसाइए।
आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिङ्गलां पद्ममालिनीम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥
हे अग्निदेव, करुणा से भीगी, कमल-सरोवर जैसी, पोषण देने वाली, सुनहरी, कमल-माला वाली, चंद्रमा जैसी स्वर्णमयी लक्ष्मी को मेरे पास लाइए।
आर्द्रां यः करिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम्। सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥
हे अग्निदेव, करुणामयी, कर्म कराने वाली, सहारा देने वाली, सुनहरी, सोने की माला वाली, सूर्य जैसी तेजस्वी स्वर्णमयी लक्ष्मी को मेरे पास लाइए।
तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्। यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान्विन्देयं पूरुषानहम्॥
हे अग्निदेव, कभी न जाने वाली उन लक्ष्मी को लाइए, जिनसे मुझे भरपूर सोना, गायें, सेवक, घोड़े और परिवार-जन मिलें।
यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम्। सूक्तं पञ्चदशर्चं च श्रीकामः सततं जपेत्॥
जो लक्ष्मी चाहता है, वह पवित्र और संयमित होकर रोज़ घी से हवन करे और इन पंद्रह ऋचाओं वाले सूक्त का निरंतर जप करे।
श्री सूक्त (लक्ष्मी सूक्त) का पाठ पूरा हुआ।
किसी अपने को WhatsApp पर भेजेंपाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।


