स्याम म्हाने चाकर राखो जी — मीराबाई — पूरे बोल और भावार्थ
‘स्याम म्हाने चाकर राखो जी’ मीराबाई की रचना है। मीरा प्रार्थना करती हैं — हे श्याम, मुझे अपनी नौकरानी (चाकर) रख लो। नौकरी में मुझे रोज़ आपके दर्शन मिलेंगे, वेतन में आपका स्मरण और जागीर में भाव-भक्ति — ये तीनों ही मेरे लिए सबसे बड़ी कमाई हैं। मैं वृंदावन की गलियों में आपकी लीला गाऊँगी।
मीराबाई की रचना। सभी संत भजन।
पाठभेद: यह पाठ प्रचलित संस्करणों से लिया गया है; अलग-अलग पुस्तकों और गायकों में कुछ शब्द अलग मिलते हैं। हम इसे मुद्रित संस्करण से मिलान कर रहे हैं।

स्याम म्हाने चाकर राखो जी, गिरधारी लाला म्हाँने चाकर राखो जी। चाकर रहस्यूँ बाग लगास्यूँ, नित उठ दरसण पास्यूँ। बिन्दरावन री कुंज गली में, गोविन्द लीला गास्यूँ॥ चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची। भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूँ बाताँ सरसी॥ मोर मुगट पीताम्बर सौहे, गल वैजन्ती माला। बिन्दरावन में धेनु चरावे, मोहन मुरली वाला॥ ऊँचा ऊँचा महल बणावँ, बिच बिच राखूँ बारी। साँवरिया रा दरसण पास्यूँ, पहर कुसुम्बी साड़ी॥ आधी रात प्रभु दरसण दीज्यो, जमनाजी रे तीरा। मीराँ रा प्रभु गिरधर नागर, हिवड़ो घणो अधीरा॥
भावार्थ: मीरा प्रार्थना करती हैं — हे श्याम, मुझे अपनी नौकरानी (चाकर) रख लो। नौकरी में मुझे रोज़ आपके दर्शन मिलेंगे, वेतन में आपका स्मरण और जागीर में भाव-भक्ति — ये तीनों ही मेरे लिए सबसे बड़ी कमाई हैं। मैं वृंदावन की गलियों में आपकी लीला गाऊँगी।
स्याम म्हाने चाकर राखो जी — मीराबाई का पाठ पूरा हुआ।
किसी अपने को WhatsApp पर भेजेंपाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।
