अजा एकादशी कब है?
अजा एकादशी 2027 में 28 अगस्त 2027, शनिवार को है। यह भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है, जिसे अन्नदा एकादशी भी कहते हैं। व्रत का पारण 29 अगस्त: सुबह 5:57 के बाद, सुबह 9:36 से पहले करें।

अजा एकादशी: तारीख़ और पारण समय
| साल | तारीख़ | एकादशी तिथि | पारण (व्रत खोलना) |
|---|---|---|---|
| 2027 | 28 अगस्त 2027, शनिवार | दोपहर 3:26, 27 अगस्त से दोपहर 12:43, 28 अगस्त तक | 29 अगस्त: सुबह 5:57 के बाद, सुबह 9:36 से पहले |
उदया तिथि के नियम से, नई दिल्ली के अनुसार।
अजा एकादशी का महत्व
कहाँ मनाया जाता है: पूरे भारत में
सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने इस व्रत के प्रभाव से अपना खोया राज्य और परिवार फिर पाया था। इसे कष्ट दूर करने वाली एकादशी कहते हैं।
कभी-कभी स्मार्त (गृहस्थ) और वैष्णव एकादशी अलग-अलग दिन पड़ती है; वैष्णव परंपरा वाले अगले दिन व्रत रखते हैं।
अजा एकादशी की पूजा विधि
- दशमी की रात से सात्विक भोजन करें और चावल न खाएँ।
- एकादशी की सुबह स्नान करके भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें।
- विष्णु जी को पीले फूल, तुलसी दल, फल और पंचामृत चढ़ाएँ, घी का दीपक जलाएँ।
- ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करें, विष्णु सहस्रनाम या एकादशी कथा पढ़ें।
- दिन में फलाहार या निर्जल व्रत अपनी क्षमता के अनुसार रखें, रात में भजन-कीर्तन करें।
- अगले दिन (द्वादशी) सूर्योदय के बाद, द्वादशी खत्म होने से पहले दान देकर व्रत खोलें (पारण)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अजा एकादशी 2027 कब है?
अजा एकादशी 2027 में 28 अगस्त 2027, शनिवार को है। यह भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है, जिसे अन्नदा एकादशी भी कहते हैं। व्रत का पारण 29 अगस्त: सुबह 5:57 के बाद, सुबह 9:36 से पहले करें।
अजा एकादशी का पारण कब है?
29 अगस्त: सुबह 5:57 के बाद, सुबह 9:36 से पहले (नई दिल्ली)।
अजा एकादशी का महत्व क्या है?
राजा हरिश्चंद्र से जुड़ी एकादशी, कष्ट दूर करने वाली। सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने इस व्रत के प्रभाव से अपना खोया राज्य और परिवार फिर पाया था। इसे कष्ट दूर करने वाली एकादशी कहते हैं।
एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?
फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू, शकरकंद और सेंधा नमक। चावल, गेहूँ, दालें, प्याज़-लहसुन और साधारण नमक नहीं खाते।
एकादशी का पारण कब करें?
अगले दिन द्वादशी तिथि में, सूर्योदय के बाद। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई हिस्सा) बीत जाने पर पारण करना श्रेष्ठ माना गया है।
एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते?
परंपरा के अनुसार एकादशी पर अन्न, ख़ासकर चावल, का त्याग किया जाता है, ताकि मन और शरीर हल्का रहे और ध्यान भगवान में लगे।
Aja Ekadashi 2027 date and parana time?
Aja Ekadashi 2027: 28 August 2027. Parana (vrat kholna): 29 अगस्त: सुबह 5:57 के बाद, सुबह 9:36 से पहले (New Delhi).
