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उत्पन्ना एकादशी कब है?

उत्पन्ना एकादशी 2026 में 4 दिसंबर 2026, शुक्रवार को है। यह मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। व्रत का पारण 5 दिसंबर: सुबह 6:59 के बाद करें।

उत्पन्ना एकादशी

उत्पन्ना एकादशी: तारीख़ और पारण समय

सालतारीख़एकादशी तिथिपारण (व्रत खोलना)
20264 दिसंबर 2026, शुक्रवाररात 11:04, 3 दिसंबर से
रात 11:45, 4 दिसंबर तक
5 दिसंबर: सुबह 6:59 के बाद
202724 नवंबर 2027, बुधवारदोपहर 1:45, 23 नवंबर से
दोपहर 12:12, 24 नवंबर तक
25 नवंबर: सुबह 6:51 के बाद, सुबह 10:52 से पहले

उदया तिथि के नियम से, नई दिल्ली के अनुसार।

उत्पन्ना एकादशी का महत्व

कहाँ मनाया जाता है: पूरे भारत में

मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु के शरीर से एकादशी देवी प्रकट हुईं और उन्होंने मुर दैत्य का वध किया। जो लोग एकादशी व्रत शुरू करना चाहते हैं, वे इसी एकादशी से शुरू करते हैं।

कभी-कभी स्मार्त (गृहस्थ) और वैष्णव एकादशी अलग-अलग दिन पड़ती है; वैष्णव परंपरा वाले अगले दिन व्रत रखते हैं।

उत्पन्ना एकादशी की पूजा विधि

  1. दशमी की रात से सात्विक भोजन करें और चावल न खाएँ।
  2. एकादशी की सुबह स्नान करके भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें।
  3. विष्णु जी को पीले फूल, तुलसी दल, फल और पंचामृत चढ़ाएँ, घी का दीपक जलाएँ।
  4. ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करें, विष्णु सहस्रनाम या एकादशी कथा पढ़ें।
  5. दिन में फलाहार या निर्जल व्रत अपनी क्षमता के अनुसार रखें, रात में भजन-कीर्तन करें।
  6. अगले दिन (द्वादशी) सूर्योदय के बाद, द्वादशी खत्म होने से पहले दान देकर व्रत खोलें (पारण)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

उत्पन्ना एकादशी 2026 कब है?

उत्पन्ना एकादशी 2026 में 4 दिसंबर 2026, शुक्रवार को है। यह मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। व्रत का पारण 5 दिसंबर: सुबह 6:59 के बाद करें।

उत्पन्ना एकादशी का पारण कब है?

5 दिसंबर: सुबह 6:59 के बाद (नई दिल्ली)।

उत्पन्ना एकादशी का महत्व क्या है?

एकादशी माता के प्रकट होने का दिन, एकादशी व्रत शुरू करने के लिए श्रेष्ठ। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु के शरीर से एकादशी देवी प्रकट हुईं और उन्होंने मुर दैत्य का वध किया। जो लोग एकादशी व्रत शुरू करना चाहते हैं, वे इसी एकादशी से शुरू करते हैं।

एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू, शकरकंद और सेंधा नमक। चावल, गेहूँ, दालें, प्याज़-लहसुन और साधारण नमक नहीं खाते।

एकादशी का पारण कब करें?

अगले दिन द्वादशी तिथि में, सूर्योदय के बाद। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई हिस्सा) बीत जाने पर पारण करना श्रेष्ठ माना गया है।

एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते?

परंपरा के अनुसार एकादशी पर अन्न, ख़ासकर चावल, का त्याग किया जाता है, ताकि मन और शरीर हल्का रहे और ध्यान भगवान में लगे।

Utpanna Ekadashi 2026 date and parana time?

Utpanna Ekadashi 2026: 04 December 2026. Parana (vrat kholna): 5 दिसंबर: सुबह 6:59 के बाद (New Delhi).

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