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सफला एकादशी कब है?

सफला एकादशी 2027 में 3 जनवरी 2027, रविवार को है। यह पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। व्रत का पारण 4 जनवरी: सुबह 7:14 के बाद, शाम 6:16 से पहले करें।

सफला एकादशी

सफला एकादशी: तारीख़ और पारण समय

सालतारीख़एकादशी तिथिपारण (व्रत खोलना)
20273 जनवरी 2027, रविवारदोपहर 2:25, 2 जनवरी से
शाम 4:09, 3 जनवरी तक
4 जनवरी: सुबह 7:14 के बाद, शाम 6:16 से पहले
202723 दिसंबर 2027, गुरुवाररात 11:41, 22 दिसंबर से
रात 11:12, 23 दिसंबर तक
24 दिसंबर: सुबह 7:10 के बाद, रात 11:09 से पहले

उदया तिथि के नियम से, नई दिल्ली के अनुसार।

सफला एकादशी का महत्व

कहाँ मनाया जाता है: पूरे भारत में

नाम के अनुसार यह कामों में सफलता देने वाली एकादशी है। कथा राजा महिष्मान के पुत्र लुम्पक की है, जिसका जीवन इस व्रत से बदल गया।

कभी-कभी स्मार्त (गृहस्थ) और वैष्णव एकादशी अलग-अलग दिन पड़ती है; वैष्णव परंपरा वाले अगले दिन व्रत रखते हैं।

सफला एकादशी की पूजा विधि

  1. दशमी की रात से सात्विक भोजन करें और चावल न खाएँ।
  2. एकादशी की सुबह स्नान करके भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें।
  3. विष्णु जी को पीले फूल, तुलसी दल, फल और पंचामृत चढ़ाएँ, घी का दीपक जलाएँ।
  4. ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करें, विष्णु सहस्रनाम या एकादशी कथा पढ़ें।
  5. दिन में फलाहार या निर्जल व्रत अपनी क्षमता के अनुसार रखें, रात में भजन-कीर्तन करें।
  6. अगले दिन (द्वादशी) सूर्योदय के बाद, द्वादशी खत्म होने से पहले दान देकर व्रत खोलें (पारण)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सफला एकादशी 2027 कब है?

सफला एकादशी 2027 में 3 जनवरी 2027, रविवार को है। यह पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। व्रत का पारण 4 जनवरी: सुबह 7:14 के बाद, शाम 6:16 से पहले करें।

सफला एकादशी का पारण कब है?

4 जनवरी: सुबह 7:14 के बाद, शाम 6:16 से पहले (नई दिल्ली)।

सफला एकादशी का महत्व क्या है?

कामों में सफलता देने वाली एकादशी। नाम के अनुसार यह कामों में सफलता देने वाली एकादशी है। कथा राजा महिष्मान के पुत्र लुम्पक की है, जिसका जीवन इस व्रत से बदल गया।

एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू, शकरकंद और सेंधा नमक। चावल, गेहूँ, दालें, प्याज़-लहसुन और साधारण नमक नहीं खाते।

एकादशी का पारण कब करें?

अगले दिन द्वादशी तिथि में, सूर्योदय के बाद। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई हिस्सा) बीत जाने पर पारण करना श्रेष्ठ माना गया है।

एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते?

परंपरा के अनुसार एकादशी पर अन्न, ख़ासकर चावल, का त्याग किया जाता है, ताकि मन और शरीर हल्का रहे और ध्यान भगवान में लगे।

Saphala Ekadashi 2027 date and parana time?

Saphala Ekadashi 2027: 03 January 2027. Parana (vrat kholna): 4 जनवरी: सुबह 7:14 के बाद, शाम 6:16 से पहले (New Delhi).

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