बसो मेरे नैनन में नंदलाल — मीराबाई — पूरे बोल और हिंदी अर्थ
‘बसो मेरे नैनन में नंदलाल’ मीराबाई का भजन है, जिसमें वे श्रीकृष्ण के मोहक रूप — साँवली सूरत, मुरली, वैजयंती माला और नूपुर — का वर्णन करते हुए उनसे अपनी आँखों में बस जाने की प्रार्थना करती हैं।
मीराबाई की रचना। सभी संत भजन।
पाठभेद: अलग-अलग पुस्तकों और गायकों में कुछ शब्द अलग मिलते हैं; यहाँ प्रचलित/मानक पाठ दिया है।

बसो मेरे नैनन में नंदलाल।
हे नंदलाल (श्रीकृष्ण), आप मेरी आँखों में बस जाइए।
मोहनी मूरति, साँवरी सूरति, नैना बने बिसाल॥
आपकी मूरत मन मोह लेने वाली है, रंग साँवला है और आँखें बड़ी-बड़ी सुंदर हैं।
अधर सुधारस मुरली राजत, उर बैजंती माल।
अमृत जैसे होंठों पर मुरली सुशोभित है और छाती पर वैजयंती माला है।
छुद्र घंटिका कटि तट सोभित, नूपुर सबद रसाल॥
कमर पर छोटी-छोटी घंटियों वाली करधनी शोभा दे रही है और पैरों के नूपुरों की ध्वनि मधुर है।
मीरा प्रभु संतन सुखदाई, भगतबछल गोपाल॥
मीरा के प्रभु संतों को सुख देने वाले और भक्तों से प्रेम करने वाले गोपाल हैं।
बसो मेरे नैनन में नंदलाल — मीराबाई का पाठ पूरा हुआ।
किसी अपने को WhatsApp पर भेजेंपाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।
