OmKiran BhaktiOmKiran Bhaktiभजन, आरती, चालीसा और मंत्र

दुर्गा मंत्र — नवार्ण मंत्र, सर्वमंगल मांगल्ये, या देवी सर्वभूतेषु — अर्थ सहित

नवरात्रि में सबसे ज़्यादा जपा जाने वाला नवार्ण मंत्र ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ है। ‘या देवी सर्वभूतेषु’ दुर्गा सप्तशती के पाँचवें अध्याय से है, जिसमें देवी को हर प्राणी में शक्ति, माँ, लक्ष्मी, बुद्धि आदि रूपों में नमन किया गया है।

नवरात्रि 2026 · सप्तश्लोकी दुर्गा

दुर्गा मंत्र — नवार्ण मंत्र, सर्वमंगल मांगल्ये, या देवी सर्वभूतेषु — अर्थ सहित

नवार्ण मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥

नौ अक्षरों वाला यह मंत्र दुर्गा सप्तशती का मूल मंत्र है — ‘ऐं’ सरस्वती, ‘ह्रीं’ महालक्ष्मी और ‘क्लीं’ महाकाली का बीज है; चामुंडा देवी से अज्ञान के बंधन काटने की प्रार्थना है। नवरात्रि में इसका जाप विशेष होता है।

सर्वमंगल मांगल्ये

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

हे सब मंगलों का मंगल करने वाली, कल्याणी, सब काम सिद्ध करने वाली, शरण देने वाली, तीन नेत्रों वाली गौरी नारायणी, आपको नमस्कार।

जयन्ती मंगला काली

ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥

जयंती, मंगला, काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा, क्षमा, शिवा, धात्री, स्वाहा और स्वधा — इन रूपों वाली देवी, आपको नमस्कार। (अर्गला स्तोत्र)

या देवी — शक्ति रूप

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी सब प्राणियों में शक्ति के रूप में बसती हैं, उन्हें बार-बार नमस्कार।

या देवी — माँ रूप

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी सब प्राणियों में माँ के रूप में बसती हैं, उन्हें बार-बार नमस्कार।

या देवी — लक्ष्मी रूप

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी सब प्राणियों में लक्ष्मी (समृद्धि) के रूप में बसती हैं, उन्हें बार-बार नमस्कार।

या देवी — बुद्धि रूप

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी सब प्राणियों में बुद्धि के रूप में बसती हैं, उन्हें बार-बार नमस्कार।

या देवी — शांति रूप

या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी सब प्राणियों में शांति के रूप में बसती हैं, उन्हें बार-बार नमस्कार।

या देवी — श्रद्धा रूप

या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी सब प्राणियों में श्रद्धा के रूप में बसती हैं, उन्हें बार-बार नमस्कार।

या देवी — दया रूप

या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी सब प्राणियों में दया के रूप में बसती हैं, उन्हें बार-बार नमस्कार।

दुर्गा मंत्र का पाठ पूरा हुआ।

किसी अपने को WhatsApp पर भेजें

पाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।

चैनल से जुड़ें