सप्तश्लोकी दुर्गा — सात श्लोक और अर्थ
सप्तश्लोकी दुर्गा में दुर्गा सप्तशती के सात प्रमुख श्लोक हैं। माना जाता है कि पूरी सप्तशती पढ़ने का समय न हो, तो इन सात श्लोकों का पाठ भी देवी को प्रसन्न करता है।
नवरात्रि में रोज़ इसका पाठ किया जाता है।

ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा। बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति॥
वे भगवती महामाया ज्ञानियों के मन को भी बलपूर्वक खींचकर मोह में डाल देती हैं।
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि। दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता॥
हे दुर्गे, याद करने पर आप सब प्राणियों का डर हर लेती हैं और स्वस्थ मन से याद करने वालों को बहुत शुभ बुद्धि देती हैं। हे दरिद्रता, दुख और भय हरने वाली, आपके सिवा कौन है जिसका मन सबका भला करने के लिए सदा दया से भरा रहता हो?
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
हे सब मंगलों का मंगल करने वाली, कल्याणी, सब काम सिद्ध करने वाली, शरण देने वाली, तीन नेत्रों वाली गौरी नारायणी, आपको नमस्कार।
शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे। सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
शरण में आए दीनों और दुखियों की रक्षा में लगी रहने वाली, सबकी पीड़ा हरने वाली देवी नारायणी, आपको नमस्कार।
सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते। भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥
हे सर्व-स्वरूपा, सबकी स्वामिनी, सब शक्तियों से युक्त देवी, हमें भय से बचाइए; हे दुर्गा देवी, आपको नमस्कार।
रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्। त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥
प्रसन्न होकर आप सारे रोग नष्ट कर देती हैं और रूठकर सारी इच्छित वस्तुएँ छीन लेती हैं। जो आपकी शरण में हैं, उन पर विपत्ति नहीं आती; वे तो दूसरों को शरण देने वाले बन जाते हैं।
सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्॥
हे तीनों लोकों की स्वामिनी, इसी तरह आप सारी बाधाएँ शांत कीजिए और हमारे शत्रुओं का नाश कीजिए।
सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ पूरा हुआ।
किसी अपने को WhatsApp पर भेजेंपाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।



