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हरे कृष्ण महामंत्र — अर्थ और श्रीकृष्ण के प्रमुख मंत्र

सोलह नामों वाला ‘हरे राम हरे कृष्ण’ महामंत्र कलि-संतरण उपनिषद् में कलियुग के लिए सबसे श्रेष्ठ बताया गया है। ISKCON में इसकी 16 माला रोज़ जपी जाती हैं।

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हरे कृष्ण महामंत्र — अर्थ और श्रीकृष्ण के प्रमुख मंत्र

हरे कृष्ण महामंत्र

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे॥

सोलह नामों वाला यह महामंत्र कलि-संतरण उपनिषद् में कलियुग के लिए सबसे श्रेष्ठ बताया गया है। ‘हरे’ भगवान की आह्लादिनी शक्ति (राधा) का संबोधन है, और राम व कृष्ण भगवान के नाम हैं — इसमें भगवान से उनकी सेवा में लगाने की पुकार है।

वासुदेव द्वादशाक्षर मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

भगवान वासुदेव (श्रीकृष्ण/विष्णु) को नमस्कार। बारह अक्षरों वाला यह मंत्र ध्रुव जी ने जपा था।

क्लेश नाशक कृष्ण मंत्र

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतः क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥

कृष्ण, वासुदेव, हरि, परमात्मा, शरणागत के क्लेश मिटाने वाले गोविंद को बार-बार नमस्कार। (श्रीमद्भागवत)

श्रीकृष्ण शरणं मम

श्रीकृष्णः शरणं मम॥

श्रीकृष्ण ही मेरी शरण हैं — पुष्टिमार्ग (वल्लभ संप्रदाय) का अष्टाक्षर मंत्र।

कृष्ण वंदना

वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्। देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥

वसुदेव के पुत्र, कंस और चाणूर का नाश करने वाले, देवकी के परम आनंद, जगद्गुरु श्रीकृष्ण को मैं नमन करता हूँ।

हरे कृष्ण महामंत्र का पाठ पूरा हुआ।

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पाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।

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